St. Martin’s Island: खूबसूरती खतरे में थी! जानिए आखिर क्यों 9 महीने के लिए बंद हुआ बांग्लादेश का सेंट मार्टिन आइलैंड?

St. Martin’s Island: बंगाल की खाड़ी में बसा सेंट मार्टिन आइलैंड बांग्लादेश की एक खास पहचान है. साफ नीला पानी, सफेद रेत, और रंग-बिरंगी समुद्री दुनिया इसे बेहद खूबसूरत बनाती है, लेकिन यही खूबसूरती अब खतरे में है. बढ़ती भीड़, लापरवाह टूरिज्म और कचरे की समस्या ने इस छोटे से द्वीप की सेहत बिगाड़ दी है. इसी वजह से सरकार ने बड़ा फैसला लिया है-1 फरवरी से इस आइलैंड को पूरे 9 महीने के लिए टूरिस्ट्स के लिए बंद किया जाएगा. मकसद साफ है प्रकृति को सांस लेने का मौका देना. यहां मौजूद मूंगा चट्टानें, समुद्री कछुए, दुर्लभ शेल्स और समुद्री पक्षियों को फिर से सुरक्षित माहौल मिल सके. यह कदम सिर्फ एक जगह को बचाने के लिए नहीं, बल्कि यह दिखाने के लिए भी है कि अगर समय रहते कदम न उठाए जाएं, तो खूबसूरत जगहें सिर्फ याद बनकर रह जाती हैं.

क्यों लिया गया यह फैसला
पिछले कुछ सालों में सेंट मार्टिन आइलैंड पर टूरिस्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी. होटल, रिसॉर्ट, पार्टी और प्लास्टिक कचरे ने प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ दिया. समुद्र किनारे तेज रोशनी, तेज म्यूजिक और भीड़ की वजह से कछुओं के अंडे देने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. मूंगा चट्टानें भी नुकसान झेल रही थीं. ऐसे में सरकार ने तय किया कि अस्थायी ब्रेक ही सबसे सही उपाय है.

टूरिज्म सीजन हुआ छोटा
आम तौर पर यह आइलैंड अक्टूबर से मार्च तक खुला रहता था, लेकिन इस बार सीजन 31 जनवरी को ही खत्म कर दिया गया. दिसंबर और जनवरी में भी रोज सिर्फ 2,000 लोगों को ही एंट्री दी गई. रजिस्ट्रेशन जरूरी था, बिना परमिशन कोई नहीं जा सकता था. इसके बावजूद पर्यावरण पर दबाव कम नहीं हुआ.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कौन-कौन से नियम लगाए गए थे
सरकार ने पहले ही कई सख्त नियम लागू किए थे:
-बीच पर रात में तेज रोशनी बंद
-लाउड म्यूजिक और पार्टी पर रोक
-बारबेक्यू और बड़े इवेंट्स पर रोक
-प्लास्टिक बोतलों की जगह रीयूजेबल बोतल लाने की सलाह
-बीच पर बाइक या मोटर गाड़ी चलाने की मनाही
-संरक्षित जंगलों में एंट्री पूरी तरह बंद

इन सबका मकसद था कि इंसानी दखल कम हो और प्रकृति खुद को संभाल सके.

स्थानीय लोगों की चिंता
इस फैसले से सबसे ज्यादा असर स्थानीय कारोबारियों पर पड़ा है. होटल मालिक, नाव चलाने वाले, गाइड और छोटे दुकानदारों की कमाई टूरिज्म पर ही टिकी है. कोविड के बाद वे पहले ही आर्थिक दबाव में थे. उनका कहना है कि पूरी तरह बंद करने के बजाय सीमित टूरिस्ट्स के साथ 4–5 महीने खोलना बेहतर होता.

सरकार की सोच क्या है
अधिकारियों का कहना है कि यह छोटा नुकसान, बड़े फायदे के लिए है, अगर अभी प्रकृति को आराम नहीं मिला, तो आगे चलकर यह जगह टूरिज्म के लायक ही नहीं बचेगी. 9 महीने की शांति से समुद्री जीवों को बढ़ने का मौका मिलेगा और मूंगा चट्टानें भी धीरे-धीरे ठीक होंगी.

भविष्य की उम्मीद
उम्मीद है कि जब दोबारा खोला जाएगा, तो ज्यादा सख्त और समझदारी वाले नियम होंगे. सीमित संख्या में टूरिस्ट्स, कचरा कंट्रोल, और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी. यह मॉडल आगे दूसरी टूरिस्ट जगहों के लिए भी मिसाल बन सकता है.

टूरिज्म बनाम प्रकृति -असली चुनौती
दुनिया भर में यही सवाल है कमाई भी चले और प्रकृति भी बचे. सेंट मार्टिन आइलैंड का मामला दिखाता है कि बिना प्लानिंग के टूरिज्म नुकसान कर सकता है. अब जरूरत है जिम्मेदार ट्रैवल की, जहां लोग घूमने जाएं लेकिन जगह को नुकसान न पहुंचाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *