खेत में बिछाएं प्लास्टिक, ऊपर लगा दें बैंगन, 9 महीने बाद सरकार देगी 50% सब्सिडी

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खेत में बिछाएं प्लास्टिक, ऊपर लगा दें बैंगन, 9 महीने बाद सरकार देगी 50%सब्सिडी

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Brinjal Farming Tips: गर्मियों में सब्जियों की खेती करना किसानों के लिए चुनौती भरा हो जाता है क्योंकि पानी की कमी और बढ़ते तापमान का सीधा असर फसल पर पड़ता है. ऐसे में बैंगन की खेती करने वाले किसानों के लिए मल्चिंग तकनीक एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इस तकनीक से खरपतवार भी कम उगते हैं और पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं जिससे उत्पादन बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार मल्चिंग के जरिए बैंगन की खेती करने पर किसान कम लागत में ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. साथ ही सरकार की ओर से इस तकनीक को अपनाने पर किसानों को सब्सिडी का लाभ भी दिया जा रहा है.

Baingan ki kheti ke Tips: गर्मियों का सीजन आने के साथ ही सब्जियों की खेती मुश्किल हो जाती है. इस सीजन में पानी की कमी से नमी खत्म हो जाती है, जिसका सीधा असर पौधे की सेहत पर पड़ता है. वहीं, मौसम कीटों और रोगों के लिए अनूकुल हो जाता है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ता है. ये सब समस्या सोलेनेसी कूल से ताल्लूक रखने वाले पौधों में ज्यादा होती है. ऐसे में हम आपकों बैंगन की खेती का एक सटीक फार्मुला बता रहे हैं, जिसे आप अप्रैल से पहले लागू कर सकते है. दरअसल, बालाघाट सहित हर जगह शादियों में बैंगन की सब्जी डिमांड में रहती है. वहीं, उत्पादन भी कम होता है. ऐसे में हम आपको बैंगन के उत्पादन के लिए जोरदार तरीका बता रहे है, जिससे लागत कम होगी और उत्पादन ज्यादा होगा.

ऐसे करें बैंगन की खेती
बालाघाट सहित हर इलाके में बैंगन की खेती करते हैं, तो उन्हें अपने खेती में मल्चिंग के माध्यम से करना चाहिए. बालाघाट विकासखंड की ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारी ने बताया कि बैंगन की खेती मल्चिंग करने से कई तरह के फायदे हो सकते हैं.
नमी संरक्षण
आमतौर पर गर्मियों में पानी की समस्या होती है. वहीं, सिंचाई करने पर भी पानी वाष्पीकृत हो जाता है. लेकिन प्लास्टिक शीट लगाने से नमी लंबे समय तक संरक्षित हो सकती है. ऐसे में नमी संरक्षण से किसान भाइयों को बार-बार सिंचाई नहीं करनी पड़ती है. इससे लागत में भी कमी आती है.

खरपतवार नियंत्रण
प्लास्टिक शीट पौधे के आसपास के इलाके को कवर कर देती है. वहीं, खेत में पौधे के आस पास खाद  और पानी मिलने से खरपतवारों के बीज एक्टिव हो जाते हैं.  सुसुप्ता अवस्था में मौजूद बीज को अनूकुल वातावरण मिलने लगता है लेकिन प्लास्टिक शीट यानी मल्चिंग की वजह नहीं मिलता है तो सूर्य का प्रकाश. ऐसे में खरपतवार की वृद्धि हो नहीं पाती है. इससे पौधे को पोषक तत्व, धूप और पानी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है और फसल की वृद्धि अच्छी होती है. वहीं, खरपतवार नियंत्रण के लिए किटनाशक और मजदूरी का खर्च भी बच जाता है.

ऐसे करें मल्चिंग में बैंगन की खेती
खेत में 1.2 मीटर चौड़े बेड तैयार करना चाहिए. एक हेक्टयर खेत के लिए 25 टन गोबर खाद का इस्तेमाल करना चाहिए मल्चिंग से पहले ड्रिप लाइन बिछा ले. फिर पौध से पौध और कतार से कतार की दूर 24 इंच दूर रखना चाहिए.
आपकी बैंगन की फसल 55 दिनों में तैयार हो जाएगी. इसके बाद आप पहली तुड़ाई कर सकते हैं. वहीं, इसका एक फायदा ये भी है कि मल्चिंग से फसल लेने पर आप लगातार 6 से 9 महीने तक उत्पादन ले सकते हैं. बशर्ते आपको रोग, कीट और जलभराव से फसल को बचाना होगा. इसमें हाइब्रिड किस्में 600 से 800 क्विंटल और सामान्य किस्मों में 200 से 300 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं.

बेहद सस्ता है ये उपाय
उद्यानिकी विभाग की तरफ से संरक्षित खेती अभियान के तहत किसानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. इसी में किसान भाइयों विभाग के माध्यम से मल्चिंग करवाने पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी मिल सकती है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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