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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से देवी की आराधना करनी चाहिए. पूजा के समय मां को गुड़ या चीनी का भोग अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है.
उज्जैन. हिंदू धर्म में चैत्र माह का विशेष महत्व बताया गया है. इस माह की जैसे ही शुरुआत होती है, हिंदू नववर्ष के साथ धार्मिक उत्सवों का दौर भी शुरू हो जाता है. इसी पावन समय में आने वाला सबसे महत्वपूर्ण पर्व है चैत्र नवरात्रि. यह उत्सव चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर पूरे 9 दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. नवरात्रि शुरू होते ही घरों और मंदिरों में माता दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिलता है. भक्त इन दिनों मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त उपवास रखकर माता रानी की आराधना करते हैं और उन्हें फल, मिठाई और विभिन्न प्रकार के प्रसाद का भोग अर्पित करते हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान माता रानी पूरे 9 दिनों के लिए धरती पर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने लिए आती हैं. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की पूजा की जाएगी और वह कैसे प्रसन्न होंगी.
नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. ‘ब्रह्म’ यानी तप और ‘चारिणी’ यानी आचरण करने वाली अर्थात मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली आदि स्रोत शक्ति हैं. मां ब्रह्मचारिणी सदैव शांत और संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन रहती हैं. कठोर तप के कारण इनके मुख पर अद्भुत तेज होता है. मां के हाथों में अक्ष माला और कमंडल होता है और इन्हें साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करने से सहज ही सिद्धि प्राप्त होती है.
कैसे पड़ा नाम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा का ब्रह्मचारिणी स्वरूप तप और साधना का प्रतीक माना जाता है. माना जाता है कि देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, इसलिए उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है. चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन इसी रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से भक्तों को धैर्य, संयम और शक्ति प्राप्त होती है. उनके आशीर्वाद से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. खासकर विद्यार्थियों के लिए उनकी पूजा बेहद शुभ मानी जाती है, जिससे बुद्धि, एकाग्रता और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है.
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से माता की आराधना करनी चाहिए. पूजा के समय मां को चीनी या गुड़ का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाले बड़े संकट दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय कम होता है. मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को सुख, शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करती हैं, इसलिए इस दिन सच्चे मन से माता का स्मरण अवश्य करें.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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