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Success Story: कौशांबी की रंजना साहू ने 2021 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कारखाना शुरू किया, जिससे परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है.
उत्तरप्रदेश के कौशांबी जिले की अधिकतर महिलाएं स्वयं सहायता समूह का सहारा लेकर आत्मनिर्भर बनने में लगी हुई हैं. महिलाएं न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि अपने साथ साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं. कौशाम्बी जिले के हब्बूनगर की रहने वाली रंजना साहू अपने पति के साथ मिलकर काम कर रही हैं. रंजन साहू घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने पति के कारोबार में भी हाथ बंटा कर काम कर रही हैं. रंजना एक गरीब परिवार से हैं और 2021 में एक समूह से जुड़कर काम शुरू किया. घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे अपने पति के साथ कारखाने में चलाती हैं. रंजना सुबह घर का काम करती हैं और फिर 10 बजे से शाम 4 बजे तक कारखाने में काम करती हैं. कारखाने में गेहूं पीसने, तेल निकालने, और बेसन व बाजरे का आटा बनाने का काम होता है. इन कामों से वे अपने परिवार का पालन-पोषण करने के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी उठा रही है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाती हैं. ऐसे में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए अच्छा मौका होता है. क्योंकि समूह से जुड़कर कारोबार करने के लिए किसी भी प्रकार का लोन आसानी से प्राप्त हो जाता है. ऐसे में महिलाएं किसी भी प्रकार का कोई भी काम आसानी से कर सकती हैं.
रंजना साहू ने बताया कि 2021 में हमने पहले समूह से जुड़कर कुछ पैसा लिया और फिर एक कारखाना शुरू किया. इस कारखाने में बाजरे का आटा, गेहूं का आटा, बेसन और सरसों की पेराई की जाती है. पहले अगर हमें ₹100 भी खर्च करना पड़ता था तो हमें 10 बार सोचना पड़ता था. लेकिन समूह से जुड़ने और अपना कारखाना शुरू करने के बाद हमारी अच्छी आमदनी हो रही है और खर्च करने में भी कोई दिक्कत नहीं होती. सबसे बड़ी बात यह है कि समूह से जुड़ने के बाद कम ब्याज पर लोन मिल जाता है. हमने भी समूह से लोन लेकर यह कारखाना डाला है. हम पिछले 4 सालों से यह कारखाना चला रहे हैं और इससे हमें अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे हम अपने परिवार और बच्चों का पालन-पोषण कर पा रहे हैं
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें
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