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Kitni der tak dal bhigona chahiye: भिगोई हुई दालें नरम हो जाती हैं और आसानी से पचती हैं. इससे गैस, सूजन और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं. दालों में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो पोषक तत्वों के अवशोषण को कम कर देते हैं. लेकिन जब दालों को कुछ घंटे पानी में भिगोते हैं तो ये तत्व कम हो जाते हैं.
घर में दाल की सब्जी बनाते समय कई लोग सीधे कुकर में दाल डालकर पकाते हैं. लेकिन दालों को पहले पानी में भिगोना अच्छा होता है. ये सिर्फ जल्दी पकाने के लिए नहीं, सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
भिगोई हुई दालें नरम हो जाती हैं और आसानी से पचती हैं. इससे गैस, सूजन और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं. दालों में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो पोषक तत्वों के अवशोषण को कम कर देते हैं. लेकिन जब दालों को कुछ घंटे पानी में भिगोते हैं तो ये तत्व कम हो जाते हैं.
इससे प्रोटीन, आयरन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व आसानी से शरीर को मिल जाते हैं. साथ ही, भिगोई हुई दालें कम समय में पक जाती हैं जिससे गैस भी बचती है. हर दाल को एक ही समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती.
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छिलका निकली हुई मूंग दाल, तुअर दाल, उड़द दाल जैसी दालों को आधे घंटे से एक घंटे तक भिगोना काफी है. चना दाल या थोड़ी सख्त दालों को दो से चार घंटे तक भिगोना अच्छा रहता है. इस दौरान दाल पानी सोखकर नरम हो जाती है.
छिलके वाली मूंग, उड़द और कुल्थी जैसी दालों को कम से कम 6 से 8 घंटे तक भिगोना चाहिए. चना, राजमा, काबुली चना जैसी सख्त दालों को रात भर भिगोना सबसे अच्छा है. ऐसा करने से ये पूरी तरह नरम हो जाती हैं और अच्छे से पकती हैं.
कुछ लोग दाल भिगोते समय पानी में एक लौंग, छोटी इलायची और तेजपत्ता डालते हैं, इससे दाल में अच्छी खुशबू आती है और पचाना भी आसान होता है. देखा जाए तो दाल भिगोना भले ही छोटी बात लगे, लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद है. सही समय तक भिगोकर पकाने से दाल का स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)