दिल्ली की सड़कों पर अब चमकदार और स्मार्ट रोशनी आने वाली है. मुनीसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने छह जोन में 3 लाख 12 हजार स्ट्रीट लाइट्स को स्मार्ट बनाने का फैसला लिया है. ये जोन हैं- करोल बाग, सिविल लाइंस, सिटी SP जोन, नरेला, रोहिणी और केशवपुरम. ये वो इलाके हैं जो पहले नॉर्थ दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के थे. इस फैसले से हर साल बिजली के बिल में 5 करोड़ रुपये की बचत होगी. सवाल ये है कि कौन सी टेक्नोलॉजी इतनी बड़ी बचत कराएगी? चलिए समझते हैं.
पुरानी लाइट्स अब खत्म हो रही हैं. 2012 से 2022 तक दिल्ली में हाई प्रेशर सोडियम वाष्प (HPSV) लाइट्स को LED लाइट्स में बदला गया था. लेकिन अब ये LED भी अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं. इसलिए MCD ने नई स्मार्ट सिस्टम लगाने का प्लान बनाया है.
ILMS है नया सिस्टम
नई टेक्नोलॉजी का नाम है इंटेलिजेंट लाइटिंग मैनेजमेंट सिस्टम यानी ILMS. इसमें खास सेंसर लगे हैं जो रीयल टाइम में सब कुछ मॉनिटर करते हैं. सबसे बड़ी बात है एडाप्टिव डिमिंग यानी अपनी चमक बदलने की क्षमता. अगर सड़क पर कोई व्यक्ति, गाड़ी या जानवर नहीं गुजर रहा तो लाइट की चमक अपने आप कम हो जाती है.
अगर काफी देर तक कोई नहीं आया तो लाइट पूरी तरह बंद भी हो सकती है. जैसे ही कोई आता है, सेंसर उसे पहचान लेता है और लाइट फिर से चमकने लगती है. इससे बिजली की बर्बादी रुकती है. रात में सड़कें खाली रहती हैं, तो वहां पूरी रात पूरी चमक में लाइट जलाने की जरूरत नहीं पड़ती. यही टेक्नोलॉजी 5 करोड़ रुपये सालाना बचा रही है.
खराब होने पर मिलेगा अलर्ट
ILMS में रिमोट मॉनिटरिंग भी है. अगर कोई लाइट खराब हो जाए तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है. अधिकारी घर बैठे पता लगा सकते हैं और शिकायत आने से पहले ही ठीक कर सकते हैं.
पहले लोगों को शिकायत करनी पड़ती थी, फिर इंतजार करना पड़ता था. अब ये प्रक्रिया बहुत तेज हो जाएगी. सुरक्षा भी बढ़ेगी क्योंकि अंधेरे में कोई रास्ता नहीं छूटेगा.यह काम 10 साल के प्लान में होगा. पहले तीन साल में इन छह जोनों की सारी लाइट्स अपग्रेड हो जाएंगी.
पुरानी एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट मई 2026 में खत्म हो रहा है, उसके बाद नई एजेंसी आएगी. बाद में अनधिकृत कॉलोनियों में भी 80 हजार पुरानी लाइट्स बदलने का सर्वे होगा. हर छह महीने में 25 प्रतिशत लाइट्स बदलती जाएंगी.
AQI कम होने में मददगार
इस स्मार्ट सिस्टम से सिर्फ पैसे ही नहीं बचेंगे. दिल्ली की हवा साफ होगी क्योंकि कम बिजली खपत से कम पावर प्लांट चलेंगे. रखरखाव आसान होगा और रात में सड़कें सुरक्षित रहेंगी.
MCD के अधिकारी कहते हैं, ‘ILMS टेक्नोलॉजी से लाइट्स की चमक खुद-ब-खुद कम-ज्यादा होती है और खराबी की शिकायत तुरंत सुलझ जाती है.’
दिल्ली सरकार और MCD का यह कदम साबित करता है कि छोटी-छोटी स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बड़ा फर्क पड़ सकता है. 3 लाख 12 हजार लाइट्स पर यह सिस्टम लगने से न सिर्फ 5 करोड़ की बचत होगी, बल्कि शहर और भी चमकदार, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनेगा.
इस प्लान को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में दिल्ली की सड़कें स्मार्ट रोशनी से जगमगाएंगी और बिजली का हर पैसा सही जगह खर्च होगा.
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