नन्हे कदम, सुनहरा मुकाम! MP को मिली सबसे छोटी कूडो चैंपियन, 5 साल की दीपांश का दिखा कमाल

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Youngest Kudo Player Deepansh: सागर की 5 साल की मासूम दीपांश ने कूडो नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर जिले और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. वह प्रदेश की सबसे कम उम्र की कूडो खिलाड़ी बन गई हैं और भविष्य में देश के लिए गोल्ड जीतने का सपना देख रही हैं. आइए जान लेते हैं उसकी जीत के पीछे की मेहनत…

Youngest Kudo Player Deepansh: बुंदेलखंड में एक कहावत है कि पूत के पांव पालने में दिखाई देने लगते हैं यानी कि नवजात भविष्य में किस तरह से आगे बढ़ सकता है पुराने लोग पालने में उसकी हरकतों को देखकर इसका अंदाजा लगा लेते हैं और ऐसा ही कुछ सागर की एक 5 साल की मासूम बेटी ने भी कर दिखाया है. जिसने कूडो नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सागर का नाम रोशन कर दिया. इतना ही नहीं गोल्ड मेडल जीतने के साथ वह मध्य प्रदेश की सबसे कम उम्र की कूडो प्लेयर भी बन गई है और वह अभी से ही भारत के लिए गोल्ड लाने के सपने देखने लगी है. माता-पिता ने भी उसकी ट्रेनिंग का समय बढ़ाया है साथ ही उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं. वर्तमान में दीपांश पहली कक्षा में है और पढ़ाई कर रही है.

ट्रेनिंग के साथ ही खान-पान का विशेष ध्यान
5 वर्षीय दीपांश की मां प्रतिभा सिंह बताती है कि आजकल के बच्चे मोबाइल में और टीवी में ज्यादा समय दे रहे हैं जिससे उनकी खेलों में गतिविधियां कम हो रही हैं और उनका समय बर्बाद हो रहा है.ऐसे में उनकी दोनों बेटियां बहुत कम मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं. क्योंकि बच्चे ज्यादा से ज्यादा खेलना चाहते हैं तो कौन है इस तरह की गेम में डालना चाहिए. उन्होंने भी अपनी बेटियों को केवल मनोरंजन और आत्मरक्षा के हिसाब से इस खेल में भेजा था लेकिन बेटी की उम्र के हिसाब से बहुत कम समय में अच्छा परफॉर्मेंस करने लगी, इसके साथ ही कॉन्फिडेंस लेवल भी बहुत ज्यादा आ गया है इसकी वजह से और अच्छा परफॉर्मेंस आने वाली समय में देखने को मिल सकता है. जिससे उसकी भी इसमें रुचि बड़ी है और वह जैसा चाहती है वैसा करते जाएंगे.

लेकिन प्रतिभा सिंह ट्रेनिंग दिलाने के साथ-साथ उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान रखे हुए हैं प्रतिभा बताती हैं कि आजकल के बच्चे जंक फूड बहुत ज्यादा खाते हैं. लेकिन हमारी दोनों बेटियां बहुत ही  रेयर होता है कि जब वह जंक फूड खाएं हम लोग घर का बना खाना ही खिलाते हैं. साथ ही जो दादी नानी के जमाने की मिलेट्स और अन्य चीज होती हैं वह घर पर ही तैयार करके खिलाते हैं जो बेटियों को भी बहुत पसंद है. जो स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा होता है.

प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलाना शुरू
यानी की मां अपनी दोनों बेटियों की सदा और अनुशासित जीवन शैली बने हुए हैं दीपांश के पिता डॉ अजय सिंह बताते हैं कि पेरेंट्स बच्चों के साथ हर समय हर जगह साथ मौजूद नहीं रह सकते हैं इसलिए हम लोगों ने आत्मरक्षा के लिहाज से इनको कूदो में डाला था की मोबाइल और गेमिंग से दूरी भी रहेगी और खेल भी होता रहेगा लेकिन जब उसकी प्रतिभा के बारे में पता चला तो फिर प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलाना शुरू कर दिया और इसका परिणाम यह रहा कि कुछ ही महीना में उसने गोल्ड मेडल जीत लिया अब हम लोग उसकी ट्रेनिंग का समय भी बड़ा रहे हैं और कोच का जैसा मार्गदर्शन रहेगा वैसे आगे बढ़ाते जाएंगे. यहां पर भी बच्चे खेलने के लिए जाते हैं हम लोग साथ में रहते हैं अभी 2025 में आयोजित हुई नेशनल चैंपियनशिप सूरत में गोल्ड मेडल जीता है हम लोगों के लिए इससे अच्छी बात तो कोई और हो ही नहीं सकती.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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5 साल की उम्र में गोल्ड! दीपांश ने रचा नया रिकॉर्ड, घरवालों ने बताया संघर्ष

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