भारत माता की जय के लगे नारे, फूल माला भी पहनाई, कुछ ऐसे हुआ प्रसन्नजीत का स्वागत, अब पाकिस्तान से पहुंचा बालाघाट

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लंबे अरसे और इंतजार के बाद प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान से बालाघाट लौट आए हैं. अब बालाघाट पहुंचने पर उनका शानदार तरीके से स्वागत हुआ. लोगों ने उन्हें फूल माला पहनाई और भारत माता की जय के नारे भी लगाए.

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बालाघाट पहुंचने पर प्रसन्नजीत का हुआ स्वागत

पाकिस्तान की जेलों से 7 भारतीयों को रिहा किया गया है. इसमें 6 पंजाब के रहने वाले हैं. वहीं एक शख्स मध्य प्रदेश के बालाघाट का रहने वाला है, जिसका नाम प्रसन्नजीत रंगारी है. वह करीब 7 साल बाद अपने वतन लौटे हैं और उन्हें वापस लाने में उनकी बहन संघमित्रा और जीजा राजेश खोबरागड़े ने अहम भूमिका निभाई है. फिर मानसिक रूप से बीमार प्रसन्नजीत घर से गायब हो गए. इसके बाद परिवार ने उन्हें काफी ढूंढा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला.

परिवार ने बालाघाट जिला प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
बालाघाट जिले के खैरलांजी के निवासी युवक प्रसन्नजीत रंगारी को रिहाई के बाद वाघा बार्डर पर भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया है. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण अमृतसर से प्रसन्नजीत को परिवार के लोग लाने में सक्षम नहीं थे,जिसके बाद प्रसन्नजीत को अमृतसर से खैरलांजी लाने के लिए उसके परिवार ने बालाघाट जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी. जिस पर कलेक्टर मृणाल मीना ने प्रसन्नजीत के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई और प्रसन्नजीत को अमृतसर से खैरलांजी लाने के इंतजाम कर उसके परिजनों के साथ एक टीम अमृतसर रवाना की थी.

लोगों ने लगाए भारत माता की जय के नारे
यह टीम अमृतसर पहुंच कर प्रसन्नजीत को लेकर बालाघाट के कटंगी पहुंचे. जहां पर कटंगी विधानसभा के विधायक गौरव पारधी ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ प्रसन्नजीत का स्वागत किया. लोगों ने प्रसन्नजीत को माला पहनाई और भारतमाता की जय के नारे भी लगाए. इसके बाद बीजेपी विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर का भी धन्यवाद दिया.

प्रसन्नजीत के पिता का हो चुका निधन
मध्य प्रदेश के बालाघाट के खैरलांजी में रहने वाला प्रसन्नजीत रंगारी पढ़ाई में तेज था, इसलिए कर्ज लेकर उनके बाबूजी लोपचंद रंगारी ने उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी. लेकिन मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर आ गया. बेटे के इंतजार में प्रसन्नजीत के पिता जी का पहले ही निधन हो चुका है.

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