Why Am I Always Sleepy : क्या आपको भी दिनभर ऐसा लगता है जैसे आंखों पर किसी ने वजन रख दिया हो? 9–10 घंटे सोने के बाद भी शरीर ढीला, दिमाग बोझिल और काम करने का मन बिल्कुल न हो? अगर हां, तो सावधान! यह सिर्फ आलस नहीं, बल्कि शरीर की खतरे की घंटी भी हो सकती है. नींद हमारी बॉडी को रीचार्ज करती है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो समझ जाएं कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लगातार ओवरस्लीपिंग कई बार लाइफस्टाइल, दवाइयों, मानसिक समस्याओं और मेडिकल कंडीशंस का संकेत होती है. अब जानते हैं वो 7 वजहें, जिनके कारण आपके दिन की शुरुआत नींद से होती है और अंत भी नींद में.
इन वजहों से आती है हर वक्त नींद-
बीमारी के दौरान नींद बढ़ जाना
टीओआई के मुताबिक, जब शरीर किसी वायरल या इन्फेक्शन से लड़ रहा होता है, जैसे फ्लू, बुखार, कोविड, तो इम्यून सिस्टम ऐसे कैमिकल्स रिलीज करता है जो नींद बढ़ाते हैं. शरीर खुद को ठीक करने के लिए लंबी नींद चाहता है, लेकिन फिर भी कमजोरी रहती है क्योंकि सारी एनर्जी बीमारी से लड़ने में खर्च हो जाती है.
ड्रग और अल्कोहल का असर-
शराब और कुछ नशे वाले पदार्थ दिमाग के उन कैमिकल्स को स्लो कर देते हैं, जो आपको जागा रखते हैं. शुरुआत में शराब जल्दी सुलाती है, लेकिन ये आपकी REM और डीप स्लीप को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. जिस वजह से सुबह उठते ही चक्कर, भारी सिर और दिनभर नींद आना महसूस होता है. लंबे समय तक अल्कोहल लेने वालों में ओवरस्लीपिंग बेहद आम है.
गड़बड़ लाइफस्टाइल-
रात में घंटों फोन चलाना, देर से सोना, शिफ्ट वर्क… ये सब बॉडी क्लॉक को पूरी तरह बिगाड़ देता है. अगर आप बच्चे, बुजुर्ग या बीमार की देखभाल कर रहे हैं, तो बार-बार नींद टूटना आम बात है. ऐसे में शरीर मौका मिलते ही ज्यादा सोने की कोशिश करता है. खासकर नाइट शिफ्ट वाले लोग दिनभर सुस्ती और ओवरस्लीपिंग से परेशान रहते हैं.
नींद की कमी और स्लीप डेट-
कई दिनों तक कम सोना… चाहे काम की वजह से हो, पढ़ाई, ट्रैवल या स्ट्रेस से, आपके शरीर पर ‘स्लीप डेट’ चढ़ा देता है. फिर जैसे ही मौका मिलता है, शरीर आपको देर तक सुला देता है. लेकिन यह बार-बार होने लगे, तो नींद का पूरा पैटर्न खराब हो जाता है, सुबह उठना मुश्किल हो जाता है.
दवाइयों के साइड-इफेक्ट-
कई दवाइयां दिमाग को सिडेट कर देती हैं जैसे एंटीहिस्टामिन, एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसाइकोटिक, पेनकिलर, मसल रिलैक्सेंट. ये दवाइयां नींद को जरूरत से ज्यादा गहरा कर देती हैं, जिसके बाद दिनभर सुस्ती और भारीपन बना रहता है. अगर नई दवा शुरू करने के बाद ये लक्षण दिखने लगे, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
शरीर की अंदरूनी समस्याएं-
हाइपोथायराइड, डायबिटीज, फाइब्रोमायल्जिया, क्रॉनिक पेन, क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम, ये सभी स्थितियां एनर्जी लेवल को बहुत कम कर देती हैं. इससे शरीर जल्दी थकता है और ज्यादा नींद मांगता है. कई बार मरीज 10–12 घंटे सोकर भी थकान महसूस करते हैं.
मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतें-
अगर आप डिप्रेशन और एंग्जायटी में सफर कर रहे हैं तो ये दोनों ही नींद को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. डिप्रेशन में लोग सामान्य से ज्यादा सोते हैं इसे हाइपरसोम्निया कहा जाता है, लेकिन फिर भी तरोताज़ा नहीं होते, क्योंकि दिमाग भावनात्मक तनाव में रहता है. एंग्जायटी मानसिक थकान बढ़ाती है, जिससे शरीर ज्यादा आराम मांगता है.
कब डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए?
अगर आप रोज 9–10 घंटे सोते हैं और फिर भी दिनभर थकान, भारीपन, नींद और मोटिवेशन की कमी महसूस करते हैं तो ये सिर्फ ‘ज्यादा सोना’ नहीं, बल्कि ओवरस्लीपिंग का गंभीर संकेत हो सकता है. अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से चेकअप कराना ज़रूरी है. सही वजह का पता लगाकर इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है.