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Sitamarhi News: सीतामढ़ी की शिक्षिका प्रियंका कुमारी का चयन राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए हुआ है. एससीईआरटी पटना द्वारा आयोजित कार्यशाला में यूनिसेफ, विक्रमशिला, आगा खां फाउंडेशन, सीएसएफ, विभिन्न डायट और सीटीई के व्याख्याता, आईसीडीएस के अधिकारी और चुनिंदा शिक्षक शामिल हैं.
तस्वीर राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) पटना के तत्वावधान में यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है. इसमें यूनिसेफ, विक्रमशिला, आगा खां फाउंडेशन, सीएसएफ, विभिन्न डायट और सीटीई के व्याख्याता, आईसीडीएस के अधिकारी और चुनिंदा शिक्षक शामिल हैं. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय आधारशिला पाठ्यचर्या को बिहार की सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के अनुसार ढालना है, ताकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्थानीय संदर्भ से जुड़ी और प्रभावी शिक्षा दी जा सके. सीतामढ़ी की शिक्षिका प्रियंका को इस कार्यशाला में साप्ताहिक शैक्षिक कैलेंडर और भाषा विकास गतिविधियों के लेखन का जिम्मा सौंपा गया है. यह जिम्मेदारी उनके अनुभव और रचनात्मक सोच का परिणाम है.
इस प्रक्रिया के तहत बिहार की संस्कृति, रीति-रिवाज, जीवनशैली और लोकसंसाधनों को पाठ्यचर्या में शामिल करने पर विशेष जोर है. कार्यशाला की मॉनिटरिंग प्राथमिक शिक्षा के उपनिदेशक प्रफुल्ल मिश्रा, एससीईआरटी से एफएलएन नोडल विभा रानी और एफएलएन पीएमयू सदस्य तेज नारायण प्रसाद कर रहे हैं. उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा तभी प्रभावी होगी, जब उसमें स्थानीय लोककथाओं, खेलों और संसाधनों की झलक मिले.
प्रियंका की पहचान और योगदान
राजकीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका प्रियंका कुमारी की पहचान अपने नवाचारी शिक्षण तरीकों के लिए है. बच्चों की बुनियादी कक्षाओं में उनकी गहरी रुचि और शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के निर्माण व उपयोग का अनुभव उन्हें अलग पहचान दिलाता है. उनकी लिखी कविता “मेरी आंगनबाड़ी” पहले ही चहक गतिविधि पुस्तिका में प्रकाशित हो चुकी है और अब बाल वाटिका के बच्चों के लिए उपयोग की जा रही है.
बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को बनाएंगी रोचक
प्रियंका का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को रोचक, मनोरंजक और सहज बनाने पर उनका विशेष ध्यान है. खेल-खेल में सीखने की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए वे ऐसी गतिविधियों का लेखन कर रही हैं, जिनसे छोटे बच्चे न केवल पढ़ाई को आनंददायक समझें बल्कि उसमें सक्रिय रूप से शामिल भी हों.
प्रियंका कुमारी का चयन इस राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए सीतामढ़ी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह इस बात का प्रमाण है कि जिले की प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं. उनकी सहभागिता से अब राष्ट्रीय आधारशिला पाठ्यचर्या में बिहार की सांस्कृतिक विरासत और सीतामढ़ी की झलक भी शामिल होगी.
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले… और पढ़ें
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