Trishala Dutt emotional post : रिश्ते भरोसे, बातचीत और समझ से चलते हैं. जब दो लोग किसी रिश्ते में होते हैं तो उम्मीद होती है कि वे अपनी बात खुलकर रखेंगे, चाहे वह खुशी हो, नाराजगी हो या मतभेद. मगर कई बार रिश्तों में एक खतरनाक तरीका अपनाया जाता है, जिसे बाहर से शांत लेकिन अंदर से बहुत नुकसानदेह माना जाता है. यह तरीका है चुप्पी. चुप रहना हर बार गलत नहीं होता, कई बार इंसान खुद को संभालने के लिए खामोशी चुनता है. मगर जब यही चुप्पी किसी को डराने, दबाने या अपराधबोध में डालने के लिए इस्तेमाल की जाए, तब वह साइलेंट अब्यूज बन जाती है. इसमें सामने वाला कुछ कहता नहीं, बस दूरी बना लेता है, नजरें फेर लेता है और बात करना बंद कर देता है. सामने वाला समझ ही नहीं पाता कि गलती क्या हुई और उसे किस बात की सजा मिल रही है. आज के समय में कई लोग इस दर्द से गुजर रहे हैं, खासकर रिश्तों में. हाल ही में संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी और बताया कि कैसे चुप्पी भी एक तरह का शोषण बन सकती है. उनकी बात ने कई लोगों के जख्मों को आवाज दी है. इस विषय में हमने विस्तार से चर्चा की भोपाल केडॉक्टर मनीष बोरासी, MBBS, MD (Senior Consultant Psychiatrist and de-addiction specialist) से.
डॉक्टर मनीष के अनुसार चुप रहना कई बार शांति नहीं, बल्कि सज़ा देने का तरीका बन जाता है. जब कोई व्यक्ति जानबूझकर बातचीत बंद कर देता है, जवाब नहीं देता या सामने वाले को अनदेखा करता है, तो वह उसे मानसिक दबाव में डालता है. इस चुप्पी से सामने वाला अपनी गलती को लेकर उलझन, अपराधबोध और असुरक्षा महसूस करने लगता है. उसे न अपनी बात रखने का मौका मिलता है, न समाधान का रास्ता दिखता है. इस तरह मौन एक अदृश्य दंड बन जाता है, जो रिश्तों में दूरी, तनाव और भावनात्मक चोट पैदा करता है.
चुप्पी से सजा देने की एक कहानी
रिया और आरव एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे. हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते थे. मगर जब भी रिया किसी मुद्दे पर अपनी असहमति जताती, आरव अचानक चुप हो जाता. न कॉल, न मैसेज, न बात. यह चुप्पी कई दिनों तक चलती. रिया खुद को दोषी मानने लगती. उसे लगता शायद उसने ज्यादा बोल दिया, शायद उसकी बात गलत थी. वह माफी मांगती, रोती, समझाने की कोशिश करती. तब कहीं जाकर आरव बात करता. धीरे-धीरे रिया ने अपनी राय रखना बंद कर दिया, क्योंकि उसे डर लगने लगा था कि फिर वही चुप्पी झेलनी पड़ेगी.
यह प्यार नहीं था, यह नियंत्रण था. चुप रहकर आरव रिया को सजा दे रहा था. यही साइलेंट अब्यूज है.
त्रिशाला दत्त का इमोशनल पोस्ट
त्रिशाला दत्त ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ लोग अपनी भावनाएं जाहिर करने के बजाय खामोशी को हथियार बनाते हैं. वे यह संदेश देते हैं कि बोलना खतरनाक है और सच कहने की कीमत रिश्ता टूटना हो सकती है.
उन्होंने साफ कहा कि किसी को चुप्पी से पनिशमेंट देना गलत है. यह रिश्ते को ठीक नहीं करता, बल्कि सामने वाले को अंदर से तोड़ देता है. उनका यह भी कहना था कि कई लोग इसलिए चुपचाप सब सहते रहते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि अगर बोले तो हालात और बिगड़ जाएंगे.
चुप्पी और आत्मसम्मान का फर्क
त्रिशाला ने यह भी समझाया कि हर चुप्पी गलत नहीं होती. अगर कोई गुस्से में है और कहता है कि उसे थोड़ी देर चाहिए ताकि वह कुछ गलत न कह दे, तो यह समझदारी है. मगर जब कोई जानबूझकर बात बंद करे ताकि दूसरा इंसान टूट जाए, तो यह पावर गेम बन जाता है.
उन्होंने लिखा कि अपनी शांति बचाने वाली खामोशी आत्मसम्मान है, लेकिन किसी और को चोट पहुंचाने वाली चुप्पी शोषण है. सच्चे रिश्ते बात करके मजबूत होते हैं, डर पैदा करके नहीं.
निजी जिंदगी और सोच
त्रिशाला दत्त बचपन से कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरी हैं. मां के जाने के बाद उन्होंने जीवन को अलग नजरिए से समझा. वे अमेरिका में रहती हैं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातों पर खुलकर बोलती हैं. यही वजह है कि उनकी बातें लोगों के दिल तक पहुंचती हैं. उनका यह पोस्ट आज के युवाओं के लिए एक जरूरी संदेश है कि रिश्ते में खुद को खो देना प्यार नहीं होता.
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