बैक टू बैक UPSC में पाई सफलता, मुजफ्फरपुर के सिद्धार्थ कृष्णा अब बनेंगे IAS

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UPSC Result 2026: मुजफ्फरपुर के सिद्धार्थ कृष्णा ने यूपीएससी में 431वीं रैंक हासिल कर बिहार का नाम रोशन किया. इससे पहले उनका 680वीं रैंक से IAAS में चयन हुआ था. उनकी सफलता में परिवार का बड़ा योगदान है. आइए जानते हैं इनकी सफलता की कहानी.

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर इलाके के रहने वाले सिद्धार्थ कृष्णा ने. सिद्धार्थ ने लगातार बैक टू बैक दूसरी बार अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इतिहास रचते हुए यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है. इस बार उन्होंने 431वीं रैंक प्राप्त कर जिले और पूरे बिहार का नाम रोशन किया है.

इससे पहले भी सिद्धार्थ ने यूपीएससी परीक्षा में 680वीं रैंक हासिल की थी. जिसके आधार पर उनका चयन Indian Audit and Accounts Services (IAAS) में हुआ था. फिलहाल वे शिमला में इस पद के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं. लेकिन अपनी रैंक में सुधार और बेहतर सेवा प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी. इस बार 431वीं रैंक हासिल कर एक नई मिसाल पेश कर दी.

सिद्धार्थ की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और परिवार के त्याग से भरी हुई है. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उसके बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी. शुरुआती दौर उनके लिए काफी कठिन रहा. तीन बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. कभी प्रीलिम्स में रुक गए तो कभी इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने अपनी गलतियों से सीखते हुए लगातार मेहनत जारी रखी.

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सिद्धार्थ के पिता महेश प्रसाद यादव बिहार पुलिस में डीएसपी हैं. फिलहाल बेगूसराय में पदस्थापित हैं. वहीं उनके नाना पंचम राय बिहार पुलिस में एसआई पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. सिद्धार्थ की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है. खासकर उनकी मां मृदुला यादव की आंखों में आज भी बेटे की सफलता के आंसू छलक आते हैं.

दरअसल, जब सिद्धार्थ चौथी कक्षा में थे तब उनका रिजल्ट उतना अच्छा नहीं था. उस समय माता-पिता दोनों नौकरी करते थे. पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते थे.  ऐसे में उनकी मां मृदुला यादव ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी सरकारी शिक्षक की नौकरी छोड़ दी. बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना शुरू किया. आज बेटे की सफलता ने उनके उस त्याग को सार्थक कर दिया.

सिद्धार्थ कहते हैं कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता और पूरे परिवार का अपार सहयोग है. वे बताते हैं कि जब इस बार रिजल्ट आया और उन्होंने अपनी मां को बताया तो मां उन्हें गले लगाकर रोने लगीं. वह पल उनके जीवन का सबसे भावुक और यादगार क्षण था.

सिद्धार्थ कृष्णा की यह कहानी न सिर्फ मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि अगर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत सच्ची हो तो सफलता जरूर मिलती है.

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