पहलगाम पर चुप रहे, क्या बॉन्डी बीच पर ट्रंप मूंद लेंगे आंख, भारत या ऑस्ट्रेलिया, आतंकियों का पाक कनेक्शन ही क्यों?

Agency:एजेंसियां

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Bondi Beach Mass Shooting Pakistan Connection: जब बॉन्डी बीच रविवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज गया और चीख-पुकार मची थी, इसी बीच तलाश चल रही थी कि ये हमलावर हैं कौन? जैसे ही इनकी पड़ताल की गई, पता चला कि इनका कनेक्शन उसी पाकिस्तान से है, जिसकी सुरक्षा की चिंता ट्रंप को कुछ दिनों पहले तक सता रही थी.

डोनाल्ड ट्रंप क्या अब भी पाकिस्तान पर करेंगे भरोसा?

Bondi Beach Mass Shooting : दुनिया में कहीं भी आतंकवादी हमला होता है, तो उसकी जड़ में अधिकतर मामलों में पाकिस्तान का नाम आता है. इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान में वो आतंकवादी अड्डे हैं, जो सामान्य लोगों को भी ऐसे कट्टरपंथी पहाड़े पढ़ा देते हैं कि वे हैवान बन जाते हैं. चाहे भारत में हुआ पहलगाम हमला हो या फिर ऑस्ट्रेलिया में हुआ बॉन्डी बीच फायरिंग कांड, इसके मूल में पाकिस्तानी हमलावर ही थे. वही पाकिस्तान, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही अरबों का डिफेंस पैकेज दिया है.

एक तरफ तो खुद को पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित बताता है, वहीं दूसरी तरफ उसी के देश से गए लोगों की आतंकवादी मानसिकता उसके लिए मुसीबत बन जाती ह. जब भारत के पहलगाम में आए आतंकवादियों ने लोगों से धर्म पूछ-पूछकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था, तब इसकी निंदा पूरी दुनिया में हुई. हालांकि जब भारत ने इसके जवाब में कार्रवाई की तो ज्यादातर देश तटस्थ हो गए. अब एक पश्चिमी देश पर जब इस तरह का हमला हुआ है, तो अमेरिका और यूरोपीय देशों का रिएक्शन क्या होगा?

पहलगाम हमले और बॉन्डी बीच हमले में क्या है समानता?

अगर दोनों हमलों को देखा जाए, तो इसमें काफी समानता है. सबसे बड़ी बात ये कि दोनों देशों में हुए हमले धर्म आधारित थे. पहलगाम के आतंकियों ने जहां हिंदू धर्म मानने वालों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया, वहीं बॉन्डी बीच पर उनके निशाने पर यहूदी थे. कई रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया कि हमलावरों ने सिर्फ हनुक्का मना रहे लोगों पर गोलीबारी की और बाकियों को वे पीछे हटा रहे थे. दोनों ही घटनाओं में मासूम और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया, जो सिर्फ खुशियां मनाने के लिए जुटे थे. फर्क बस इतना था कि ये जगह शहर के बीच थी, ऐसे में उन्हें मौका कम मिला और हमलावरों को पकड़ा या मारा जा सका. वहीं पहलगाम पहाड़ी इलाका होने की वजह से वहां सुरक्षा भी नहीं थी और आतंकी हमले के बाद भाग निकले थे.

क्वाड के दूसरे देश में आतंकी हमला, क्या अब चुप रहेगा अमेरिका?

इस हमले के साथ बड़ी बात ये भी है कि ये ऑस्ट्रेलिया में अंजाम दिया गया. मारा गया हमलावर साजिद पाकिस्तान से 1998 में ही ऑस्ट्रेलिया आ गया था और यहीं एक स्थानीय महिला से शादी करके बस गया था. उसके बेटे नावीर अकरम का जन्म भी यहीं हुआ, लेकिन आतंकी मानसिकता से वो भी नहीं बचा. लोन वुल्फ अटैक वाले रास्ते पर चलकर इन दोनों ने जो कत्ल-ए-आम मचाया, वो सबने देखा. भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही क्वाड संगठन के सदस्य देश हैं, जिसमें अमेरिका भी शामिल है. जब हमले के साथ पाकिस्तान का नाम जुड़ गया है, तो क्या ट्रंप उस पर कोई कार्रवाई करेंगे?

इजरायल के साथ खड़ा होगा अमेरिका या पाकिस्तान के साथ?

अब तक इजरायल और हमास की लड़ाई से सीधे तौर पर पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं था. ऑस्ट्रेलिया में हुए हमले में यहूदियों पर गोलीबारी करने वाले पाकिस्तानी मूल के निकले, ऐसे में ये मामला इजरायल से जुड़ गया है. इजरायली पीएम ने तो तुरंत ऑस्ट्रेलिया से कार्रवाई की मांग कर दी थी, लेकिन अमेरिका की आंखें इस पर कब खुलेंगी? पाकिस्तान के आतंकवाद को कभी भारत-पाक का सैन्य संघर्ष नाम देने वाले अमेरिका को क्या मासूम यहूदियों पर हुआ ये अत्याचार भी सच नहीं दिखा पाएगा? पाकिस्तानी मूल के साजिद और उसके बेटे का यहूदी लोगों ने क्या बिगाड़ा था, जो वे उन पर गोलीबारी करने चले गए? ये कट्टरपंथी मानसिकता है, जो सिर्फ उन्माद में अंधी होती है, लेकिन इसे पालने वाले पाकिस्तान जैसे देश हर चाल सोच-समझकर चलते हैं.

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Prateeti Pandey

News18 में Offbeat डेस्क पर कार्यरत हैं. इससे पहले Zee Media Ltd. में डिजिटल के साथ टीवी पत्रकारिता भी अनुभव रहा है. डिजिटल वीडियो के लेखन और प्रोडक्शन की भी जानकारी . टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के सा…और पढ़ें

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पहलगाम हो या बॉन्डी बीच, आतंकियों का पाक कनेक्शन ही क्यों?

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