छतरपुरः बिजनेस में जब सफलता मिलती है तो उसकी चर्चा दूर तक होती है. गुजरात के कच्छ के रहने वाले नवीनचंद राव लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि हम गुजरात के कच्छ से हैं. अभी मप्र के छतरपुर के खजुराहो में एमपी गवर्नमेंट ने आदिवर्त स्थापना के तीसरे समारोह में 5 दिनों के लिए हमें यहां बुलाया था. इसलिए छतरपुर के लोगों को भी शॉल बेचे हैं.
पीढ़ियों से बना रहे शॉल
6 दिन में तैयार करते हैं साल
नवीनचंद बताते हैं कि हमारे यहां शॉल ₹800 से शुरू होते हैं और इसी शॉल को बनने में 2 दिन लग जाते हैं. वहीं जो सबसे महंगा शॉल है वह 4500 रुपए का है, जिसको बनने में 6 दिन लगते हैं. क्योंकि 2 दिन तो लूम का काम चलता है और 2 दिन मिरर वर्क का काम चलता है और बाकी दो दिन उसको तैयार होने में लग जाते हैं. यानी कि इस शॉल को बनने में 6 दिन लग जाते हैं. इसमें जो भी हमने ऊपर से लगाया है वह कोई फेविकोल से नहीं चिपकाए हैं , हाथ से ही सब बनाते हैं. इसलिए इसमें समय लग जाता है.
6 महीने ही बिजनेस होता है
नवीनचंद बताते हैं कि हमारा यह बिजनेस 6 महीने चलता है और 6 महीने ऑफ सीजन रहता है. इस ऑफ सीजन में शॉल बनाकर स्टॉक करते हैं. बरसात और गर्मी के सीजन में हम शॉल नहीं बेचते हैं बल्कि स्टॉक करते हैं. हम ये शॉल 6 महीने तक स्टॉक करके रखते हैं. इसके बाद ठंड के सीजन में इस सेल करना शुरू कर देते हैं. नवीनचंद बताते हैं कि यह बिजनेस हमारा फैमिली बिजनेस है तो इसमें बाई, मम्मी, पापा, भाई और मेरी बेटी सब लगे रहते हैं. फैमिली सपोर्ट करती है यही हम गुजरात के लोगों की पहचान भी है. आज भी गुजरात में फैमिली ही सबकुछ है. इस बिजनेस से मुझे साल भर में आसानी से 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है. इसलिए ये बिजनेस हमारे लिए फायदेमंद का बिजनेस साबित होता है.
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