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4 घंटे पहले
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आज (14) माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, इसे षट्तिला एकादशी व्रत कहा जाता है। इस व्रत में तिल से जुड़े 6 शुभ काम खासतौर पर किए जाते हैं। एकादशी पर व्रत के साथ ही भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का विशेष अभिषेक करना चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस साल षट्तिला एकादशी के साथ मकर संक्रांति और बुधवार का शुभ योग बना है। आज दोपहर के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को रहेगा। सूर्य के राशि परिवर्तन के समय की वजह से मकर संक्रांति की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, कुछ जगहों पर 14 जनवरी को और कुछ जगहों पर 15 तारीख को ये पर्व मनाया जाएगा। जानिए षट्तिला एकादशी से जुड़ी मान्यताएं…
- एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ ही भगवान गणेश, सूर्यदेव और बुध ग्रह के लिए भी विशेष पूजा करनी चाहिए। बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। बुधवार को हरे मूंग का दान करना चाहिए। गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाएं। ॐ बूं बुधाय नमः मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। इसके लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- एकादशी पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा की जाती है। अगर आपके घर में बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित है, तो दक्षिणावर्ती शंख से भगवान का अभिषेक करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं। कृं कृष्णाय नम: और ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। मंत्र जप तुलसी की माला से करें।
- एकादशी पर तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। सूर्य को जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। किसी मंदिर में गुड़ का दान करें।
- किसी गोशाला में हरी घास का दान करें। गायों की देखभाल के लिए अपने शक्ति के अनुसार धन दें। गायों की देखभाल करें।
- जो लोग इस तिथि पर व्रत करते हैं, उन्हें दिनभर निराहार रहना चाहिए यानी अन्न का सेवन न करें। पूरे दिन भूखे रहना संभव न हो, तो दिन में एक बार फलाहार कर सकते हैं, दूध का सेवन कर सकते हैं।
- शातातप स्मृति ग्रंथ के अनुसार, षट्तिला एकादशी पर तिल से जुड़े 6 काम करना चाहिए। इस ग्रंथ में लिखा है-
तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।
इस श्लोक के मुताबिक, षट्तिला एकादशी पर तिल मिले जल से नहाना, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिला हुआ पानी पीना, तिल का भोजन और तिल का दान करने से सभी पापों के फल खत्म हो जाते हैं।
तिल देवताओं का प्रिय अन्न है। ग्रंथों में बताया गया है कि तिल की उत्पत्ति ब्रह्मा ने की है। इसलिए धर्म-कर्म में तिल के इस्तेमाल से भक्तों के दुख दूर होते हैं।
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