शमशीर ने पिता के अभाव और गरीबी को दी मात! मैट्रिक में 485 अंक ला रचा इतिहास

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Bihar Board Matric Topper Shamsheer Akhtar Story: पिता का साया उठा तो मां ने सिलाई मशीन चलाकर पाला. अब समस्तीपुर के शमशीर अख्तर ने मैट्रिक परीक्षा में बिहार में छठा स्थान पाकर इतिहास रच दिया है. गरीबी और संघर्ष के बीच उपजे इस लाल के डॉक्टर बनने के संकल्प की पूरी कहानी यहां पढ़ें.

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समस्तीपुरः समस्तीपुर जिले से निकली यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि दर्द, संघर्ष और अटूट हौसले की मिसाल है. मिल्लत अकैडमी के छात्र शमशीर अख्तर ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा में 500 में से 485 अंक हासिल कर पूरे बिहार में छठा स्थान प्राप्त किया है. लेकिन इस उपलब्धि के पीछे की कहानी बेहद भावुक कर देने वाली है. महज चार साल की उम्र में ही शमशीर के सिर से पिता का साया उठ गया था. गंभीर बीमारी से जूझते हुए उनके पिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उस छोटे से बच्चे को शायद उस वक्त समझ नहीं था कि जिंदगी कितनी बड़ी परीक्षा लेने वाली है, लेकिन समय के साथ उसने हर मुश्किल को अपना साथी बना लिया.

मां बनी ताकत, सिलाई मशीन से चलाया घर
पिता के जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी शमशीर की मां के कंधों पर आ गई. वह आंगनबाड़ी सेविका के रूप में काम करती हैं, लेकिन इतनी आय से घर चलाना आसान नहीं था. इसलिए दिनभर की नौकरी के बाद वह घर लौटकर सिलाई मशीन चलातीं और परिवार का भरण-पोषण करती रहीं. शमशीर बताते हैं कि उनकी मां ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं या घर में आर्थिक तंगी है. हर हाल में उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. यही वजह है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शमशीर ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया और मां की मेहनत को अपनी ताकत बना लिया.

अनुशासन और लगन ने दिलाई पहचान
शमशीर की सफलता यूं ही नहीं आई. इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन की बड़ी भूमिका रही है. वे रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे और साथ ही 2 घंटे कोचिंग में भी पढ़ाई करते थे. उनका पसंदीदा विषय गणित और विज्ञान रहा, जिसमें उन्होंने 100 में 99-99 अंक हासिल किए. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे. शमशीर के बड़े भाई ने भी परीक्षा दी, लेकिन शमशीर की यह उपलब्धि पूरे परिवार और इलाके के लिए गर्व का कारण बन गई. रिजल्ट घोषित होते ही उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी और खुशी का माहौल बन गया.

पिता की याद ने दिया लक्ष्य, अब डॉक्टर बनकर करेंगे सेवा
शमशीर की इस सफलता के पीछे सिर्फ अंक नहीं, बल्कि एक गहरा संकल्प भी छिपा है. वे कहते हैं कि उनके पिता की मौत सही इलाज न मिलने की वजह से हुई थी, और यही बात उन्हें अंदर से झकझोरती है. उन्होंने ठान लिया है कि वे आगे चलकर डॉक्टर बनेंगे, ताकि किसी और को वैसी पीड़ा न झेलनी पड़े जैसी उनके परिवार ने झेली. उनका कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि समाज सेवा करना है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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