पहले से ही कंगाल पाकिस्तान पर गिरी गाज, मदद के लिए फिर से IMF का दरवाजा खटखटाएंगे शहबाज


Pakistan Crude Import: कर्ज के चल रही पाकिस्तान की इकोनॉमी के सामने पहले ही कई चुनौतियां हैं. ऊपर से अब ईरान-इजरायल के बीच जंग ने परेशानी और बढ़ा दी है. पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के चलते पााकिस्तान का तेल के आयात पर महीने का खर्च 600 मिलियन डॉलर (करीब 60 हजार करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है. पाकिस्तान में न्यूज पेपर Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि सरकार पर बढ़ते इस आर्थिक बोझ के दबाव को कम करने के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से पेट्रोलियम लेवी (Tax) में राहत देने की अपील की जाएगी.   

बीते रविवार को संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए औरंगजेब ने बताया कि पश्चिमी एशिया में जंग के हालातों में पाकिस्तान का महीने का ऑयल इम्पोर्ट बिल बढ़कर 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार तेल की बढ़ती कीमतों के असर से निपटने के लिए दूसरा प्लान बना रही है. इस बीच, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने फ्यूल बचाने के तरीकों पर गौर फरमाने की बात कही है ताकि देश के पास मौजूदा रिजर्व को ज्यादा समय तक के लिए चलाया जा सके. इसके अलावा, पाकिस्तान ओमान, सऊदी अरब जैसे देशों के भी संपर्क में है ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा दूसरे वैकल्पिक मार्गों से तेल की सप्लाई की जा सके. 

पाकिस्तान में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत 

इस बीच पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी 55 PKR प्रति लीटर तक बढ़ा दी है. इसी के साथ पाकिस्तान में अब पेट्रोल की कीमत 321.17 PKR प्रति लीटर और डीजल की कीमत 335.86 Pहै. KR प्रति लीटर हो गई. सरकार के इस फैसले से वहां की जनता पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. लोग पहले से ही रमजान के महीने में बढ़े हुए खर्च से जूझ रहे हैं. वहीं,अब पेट्रोल-डीजल की कीमत में हुई बढ़ोतरी ने घर के बजट को बिगाड़ दिया है.

दबाव में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार

पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में अभी 21.43 मिलियन डॉलर है. इनमें से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के पास 16.3 बिलियन डॉलर है. ऐसे में तेल के आयात पर 600 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से घट सकता है. वैसे भी पाकिस्तान पर पहले से ही दूसरे देशों से ली गई 23 बिलियन डॉलर के कर्ज की तलवार लटक रही है. ऐसे में तेल के महंगे बिल से ज्यादा से ज्यादा डॉलर आयात में चला जाएगा.इससे कर्ज की किश्ते चुकाने के लिए फिर से नए लोन या रोलओवर का सहारा लेना पड़ सकता है.

 

ये भी पढ़ें:

पाकिस्तान में मारा-मारी, सरकार ने कर दिया पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने का ऐलान; फ्यूल डलवाने भागे लोग

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *