घर की गरीबी देख छोड़ा गांव, मुंबई गए तो बनकर लौटे ‘किंग’, जानिए Aristo फाउंडर किंग महेंद्र की कहानी

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Famous Personality Aristo Pharma Founder king Mahendra: बिहार की धरती पर एक से बढ़कर इंसान जन्म लिए हैं, जिन्होंने राज्य का नाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रोशन किया है. ये सभी व्यक्ति सब बड़े घरों या जमींदारों के यहां से ही नहीं थे, बल्कि कुछ गरीब घर के भी लोग रहे हैं. उनकी असाधारण प्रयास और लगन ने बिहार का नाम विश्व पटल पर लाकर खड़ा किया है.

बिहार में वैसे तो 38 जिले हैं, जहानाबाद का नाम भी इस कड़ी में यहां से जन्मे हुए लोगों ने रोशन किया है. कई नामों में सम्प्रदा सिंह (ALKEM फाउंडर) और किंग महेंद्र (Aristo फाउंडर) काफी वैल्यूएबल साबित हुए. इन्होंने जहानाबाद का नाम प्रदेश, देश और विदेशों में रोशन किया.

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महेंद्र प्रसाद का जन्म जहानाबाद जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर मोदनगंज प्रखंड स्थित गोविंदपुर गांव में हुआ था. वो बिल्कुल साधारण परिवार से आते थे. पिता वासुदेव सिंह बहुत ही गरीब किसान थे. उनकी प्राथमिक शिक्षा दीक्षा गांव के ही उच्च विद्यालय से पूरी हुई. पटना से इकोनॉमिक्स में BA की डिग्री ली.

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महेंद्र प्रसाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हुई. उसके बाद बेरोजगार थे. परेशान महेंद्र प्रसाद ने गांव छोड़ने का फैसला किया. इसके बाद वो सीधा मुंबई चले गए. महेंद्र प्रसाद ने अपना करियर दवा के क्षेत्र में MR से शुरू की थी. वो इसी क्षेत्र में धीरे धीरे आगे बढ़ते रहे.

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मुंबई में वो सबसे पहले एक छोटी सी दवा कंपनी में साझेदार बने. महज 31 साल की उम्र में अरिष्टो फार्मा नाम से दवा की खुद की कंपनी बना ली. यह साल 1971 था. इस दवा कंपनी की शुरुआत के बाद उन्होंने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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दवा के क्षेत्र में महेंद्र प्रसाद ने नाम और पैसा खूब कमाया. अरिस्टो फार्मास्युटिकल्स के अलावा उनकी अन्य कंपनियों में माप्रा लेबोरेटरीज और इंडेमी हेल्थ स्पेशलिटीज भी शामिल हैं. सभी का मुख्यालय मुंबई में है. अरिष्टो फार्मा आज भारत की अग्रणी दवा कंपनियों में से एक है. कई दूसरे देशों में भी इनकी दवाई सप्लाई होती है.

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किंग महेंद्र की राजनीतिक करियर की शुरुआत 1963 में हुई थी. 1980 में सबसे पहले कांग्रेस के टिकट पर जहानाबाद लोकसभा से चुनाव लड़े और जीत भी हासिल की. सीपीआई के रामाश्रय यादव से जब चुनाव हारे, लेकिन फिर भी राजीव गांधी के करीबी होने के नाते कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंच गए. उसके बाद से लगातार राज्यसभा के सदस्य रहे. उनकी पार्टियों की सदस्यता बदलती रही हो, लेकिन हर बार राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे.

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किंग महेंद्र की Aristo फार्मा देश की 10 बड़ी कंपनियों में से एक है. जानकारी के मुताबिक, कम्पनी के पास करीब पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी है.

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