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Bhopal Poor Engineering Cases: भोपाल में खराब इंजीनियरिंग के ऐसे 5 केस हैं, जिन्होंने मध्य प्रदेश की राजधानी की किरकिरी पूरे देश में करा दी. इसमें नगर निगम मीटिंग हॉल केस और 90 डिग्री पुल तो ज्यादा फेमस हुए. जानें सब…
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खराब इंजीनियरिंग के कई नमूने देखने को मिल जाएंगे. ये ऐसे नमूने हैं, जिनकी किरकिरी किरकिरी पूरे देश में हो चुकी है. यहां आए दिन खराब इंजीनियरिंग के मामले अब भी सामने आते रहते हैं. इसमें मुख्य रूप से भोपाल मेट्रो के दो स्टेशन शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 90 डिग्री वाला ब्रिज भी खूब वायरल हुआ. लोकल 18 के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि खराब इंजीनियरिंग के कुछ ऐसे मामले, जिसके चलते भोपाल का नाम खराब हुआ.
दरअसल, लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग बनाई है. सबसे बड़ी बात तो ये रही कि पूरी बिल्डिंग बनाकर तैयार करने के बाद जिम्मेदारों को याद आया की इसमें मीटिंग हॉल तो बनाना ही भूल गए. अब पास की खाली 0.25 एकड़ जमीन कलेक्टर से मांगी गई है. हालांकि, यहां अब नई बिल्डिंग को बनाने में भी 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इसके अलावा कुछ अन्य प्रोजेक्ट भी रहे हैं, जो खराब इंजीनियरिंग का जीता जागता उदाहरण साबित हुए.
भोपाल मेट्रो एमपी नगर स्टेशन
सबसे पहले भोपाल मेट्रो के एमपी नगर के प्रगति पेट्रोल पंप के पास बन रहे मेट्रो स्टेशन पर गलत इंजीनियरिंग की बात निकलकर सामने आई. यहां ट्राले और कंटेनर जैसे बड़े वाहनों को निकलने की पर्याप्त जगह नहीं दी गई, जिससे बड़े वाहनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता. इसके बाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़क की खुदाई शुरू की गई. सड़क से स्टेशन की ऊंचाई बढ़ाने के लिए यह कवायद की गई थी.
भोपाल मेट्रो केंद्रीय विद्यालय स्टेशन
इसके अलावा भोपाल मेट्रो के एक एडमिनिस्ट्रेशन पर भी कुछ ऐसा ही खराब इंजीनियरिंग का नमूना देखने को मिला. मेट्रो के इंजीनियरों ने खंभों पर केंद्रीय विद्यालय स्टेशन बनाते समय सतह से स्टेशन के आधार की मानक ऊंचाई को नजरअंदाज किया. अब जब काम पूरा हो गया तो समझ में आया कि इसकी ऊंचाई केवल 4.8 फीट है, जो मानक ऊंचाई 5.5 फीट से कम है. बड़े ट्रक, ट्राले और डंपर लगातार स्टेशन से टकरा रहे थे, जब ये बात नजर में आयी तो सड़क खोदकर गहराई बढ़ाई जा रही है.
90 डिग्री वाला ब्रिज
भोपाल का ऐशबाग आरओबी अपनी डिजाइन के कारण विवादों में आया. पुल में 90 डिग्री का तीखा मोड़ निकलकर सामने आया, जिसके बाद लोगों ने इस डिजाइन को लेकर जमकर सवाल खड़े किये. पुल की डिजाइन कुछ ऐसी थी कि यह हादसों का कारण बन सकता था. बता दें, इस पुल को बनाने में 18 करोड़ रुपये लगे और करीब 8 साल से ज्यादा का समय लगा.
बावड़िया कलां ब्रिज
करीब 5 साल पहले बनाया गया बावड़िया कला ओवर ब्रिज की डिजाइन भी कुछ अजीब सी है. यहां नर्मदापुरम रोड की ओर उतरते समय इसे टी शेप का आकार दिया गया है, जिसकी वजह से कई बार तेज रफ्तार में वाहन अपना नियंत्रण खोकर सीधे ब्रिज से टकरा जाते हैं. आठ सौ मीटर लंबाई के इस ओवर ब्रिज को बनाने में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत लगी थी.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें
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