ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. रामबिलास सिंह भदौरिया को छठवें वेतन आयोग के अनुसार पूरी पेंशन, एरियर और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को 1 जनवरी 2006
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय फंड की कमी का हवाला देकर किसी भी कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि डॉ. भदौरिया 31 अगस्त 2007 को सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन उन्हें अब तक छठवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया, जो कि कानूनी रूप से गलत है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर संशोधित पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) और जीपीओ (ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर) जारी करे। इसके साथ ही, सभी लंबित एरियर का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने का भी आदेश दिया गया है।
अदालत ने 2016, 2019 और 2022 में इसी तरह के मामलों में दिए गए पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को पहले ही छठवें वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है, इसलिए डॉ. भदौरिया के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।