सतना को मिलेगा नया वॉटर नेटवर्क, करोड़ों की परियोजना से बदलेगा सप्लाई सिस्टम

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Satna News: इस परियोजना के माध्यम से सिर्फ जल आपूर्ति ही नहीं बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है. एनीकट के निर्माण से पानी के संग्रहण की क्षमता बढ़ेगी और पूरे साल पानी उपलब्ध रखने में मदद मिलेगी.

सतना. मध्य प्रदेश के सतना शहर में लंबे समय से बनी जल समस्या को दूर करने की दिशा में अब बड़ा कदम उठाया गया है. शहरवासियों के लिए राहत की खबर है कि अब जिगनहट क्षेत्र में सतना नदी पर एक नया एनीकट बनाया जाएगा, जिससे न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि सप्लाई व्यवस्था भी मजबूत होगी. अभी तक पूरा शहर केवल माधवगढ़ स्थित एक एनीकट पर निर्भर था, जिसके कारण सप्लाई बंद होने पर पूरे शहर में संकट की स्थिति बन जाती थी लेकिन इस नई परियोजना से आने वाले समय में पानी की समस्या पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है. सतना में अभी तक जल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था एक ही स्रोत पर आधारित थी. माधवगढ़ स्थित एनीकट से ही पूरे शहर को पानी दिया जाता था. ऐसे में जब किसी कारणवश वहां से सप्लाई बाधित होती थी, तो शहर के सभी वार्डों में पानी की किल्लत हो जाती थी. इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से दूसरे एनीकट की जरूरत महसूस की जा रही थी.

लोकल 18 से बातचीत में सतना के महापौर योगेश ताम्रकार ने बताया कि यह मांग पिछले कई वर्षों से उठ रही थी. अब प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए जिगनहट क्षेत्र में नया एनीकट बनाने का निर्णय लिया है, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था को दो हिस्सों में बांटा जा सकेगा और जोखिम कम होगा.

जिगनहट परियोजना से 13 वार्डों को सीधा लाभ
नई योजना के तहत सोहावल बाईपास के पास आदित्य कॉलेज के पीछे से गुजरने वाली सतना नदी पर एनीकट का निर्माण किया जाएगा. इस एनीकट के तैयार होने के बाद रेलवे लाइन के उस पार स्थित शहर के 13 वार्डों को सीधे इसी स्रोत से पानी सप्लाई किया जाएगा जबकि बाकी वार्डों को माधवगढ़ एनीकट से पानी मिलता रहेगा. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जल वितरण का दबाव कम होगा और सप्लाई ज्यादा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी. साथ ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी की उपलब्धता भी संतुलित रहेगी.

अब सुबह-शाम मिलेगी पानी की सप्लाई
अभी शहर में सीमित समय के लिए ही पानी की सप्लाई हो पाती है, जो औसतन करीब दो घंटे तक ही रहती है लेकिन नए एनीकट और पाइपलाइन नेटवर्क के विकसित होने के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा. महापौर ने कहा कि भविष्य में शहरवासियों को सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे पानी सप्लाई किया जा सकेगा. यह बदलाव खासतौर पर उन इलाकों के लिए राहत भरा होगा, जहां पानी की कमी के कारण लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है.

तीन ओवरहेड टैंक भी बनाए जाएंगे
मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 8 अप्रैल 2026 को इस परियोजना का शुभारंभ किया. जिगनहट क्षेत्र में 41.37 करोड़ रुपये की लागत से यह जल प्रदाय योजना अमृत 2.0 योजना के तहत विकसित की जा रही है. इस परियोजना में केवल एनीकट ही नहीं बल्कि एक आधुनिक फिल्टर प्लांट, करीब 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन और तीन ओवरहेड टैंक भी बनाए जाएंगे. इन सभी सुविधाओं के माध्यम से शहर के 13 वार्डों में स्वच्छ और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

जल संरक्षण और पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के जरिए केवल जल आपूर्ति ही नहीं बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है. एनीकट के निर्माण से पानी के संग्रहण की क्षमता बढ़ेगी और सालभर पानी उपलब्ध रखने में मदद मिलेगी. प्रभारी मंत्री ने इस एनीकट को सदानीरा वाटर वाड़ी के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया है, जिससे इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में भी तैयार किया जा सके. इससे शहर को एक नया आकर्षण मिलेगा और स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है.

भविष्य की जरूरतों का रखा ध्यान
वर्तमान में सतना शहर में लगभग 58 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है लेकिन बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए वर्ष 2045 तक इसकी जरूरत 70 एमएलडी तक पहुंचने का अनुमान है. नई परियोजना के तहत 12 एमएलडी पानी संग्रहित किया जा सकेगा, जिससे भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही बरगी नहर से आने वाले नर्मदा जल का उपयोग कर एनीकट को सदानीरा बनाए रखने की भी योजना है. सतना और टमस दोनों ही नदी गंगा नदी में जाकर मिलती हैं. ऐसे में इन नदियों के जल को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नमामि गंगे परियोजना की टीम को भी शामिल किया जा रहा है. इसके तहत एक अलग प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है, जिससे जल गुणवत्ता में सुधार किया जा सके. इस पूरी परियोजना को अगले 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है यानी साल 2027 तक इसका कार्य पूर्ण हो जाएगा.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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