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3 घंटे पहले
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जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते-जाते रहते हैं। कभी हालात हमारे मन के मुताबिक होते हैं, तो कभी बिल्कुल उलट। ऐसे में सबसे जरूरी है- धैर्य और हमारी सोच का सकारात्मक होना। निराशा व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक देती है, जबकि सकारात्मक सोच मुश्किल से मुश्किल हालात में भी रास्ता दिखा देती है और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। धैर्य और सकारात्मकता ही सफल जीवन के मूल सूत्र हैं। ये बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं, जानिए ये लोक कथा…
पुराने समय की बात है। किसी क्षेत्र में एक संत बहुत प्रसिद्ध थे। उनकी बुद्धिमानी और शांत स्वभाव के कारण सभी उनका सम्मान करते थे। लोग दूर-दूर से अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते थे और संत अपने सरल उपदेशों से सभी को सही रास्ता दिखा देते थे। संत के आश्रम में कई शिष्य भी उनके साथ रहते थे।
गांव के लोग रोज आश्रम आते और संत के प्रवचन सुनते। एक दिन संत का एक धनी भक्त आश्रम पहुंचा और उसने गाय दान में दी। गाय को देखकर सभी शिष्य बहुत खुश हो गए। सबके मन में एक ही बात थी कि अब रोज ताजा दूध पीने को मिलेगा। शिष्यों ने खुशी-खुशी यह बात अपने गुरु को बताई।
संत ने मुस्कुराते हुए कहा कि अच्छी बात है, अब सभी को दूध मिलेगा।
इसके बाद कुछ दिनों तक आश्रम में सभी को भरपूर दूध मिलने लगा। शिष्य और संत सभी नियमित रूप से दूध पी रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद वही दानी व्यक्ति आश्रम आया और उसने अपनी गाय वापस मांग ली।
संत ने बिना किसी झिझक के गाय उसे लौटा दी। यह देखकर सभी शिष्य उदास हो गए। उन्हें लगा कि अब ताजा दूध नहीं मिलेगा।
शिष्यों के निराश चेहरे देखकर गुरु ने कहा कि निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। अब हमें गाय का गोबर और गंदगी साफ नहीं करनी पड़ेगी। इससे हमारा काफी समय बचेगा। अब हम उस समय का उपयोग तप, ध्यान और पढ़ाई में कर सकते हैं।
एक शिष्य ने पूछा कि गुरुजी, क्या आपको इस बात का दुख नहीं हुआ कि अब दूध नहीं मिलेगा?
गुरु ने उत्तर दिया कि हमें हर हाल में सकारात्मक रहना चाहिए। यही सुखी और सफल जीवन का रहस्य है। जब गाय मिली, तब भी हमने ज्यादा खुशी नहीं मनाई और जब चली गई, तब भी हम दुखी नहीं हुए। गाय की वजह से सफाई में समय जाता था। अब वही समय हम अपने विकास में और प्रभु की भक्ति में लगाएंगे। सभी शिष्य गुरु की बात समझ गए और उनके मन की निराशा दूर हो गई।
प्रसंग की सीख
- यह कहानी हमें सबक सिखाती है कि हालात जैसे भी हों, हमारी सोच सकारात्मक रहनी चाहिए। नकारात्मक सोच छोटी समस्या को बड़ा बना देती है।
- हर स्थिति के दो पहलू होते हैं। अगर हम केवल नुकसान पर ध्यान देंगे, तो दुख बढ़ेगा, लेकिन अगर उसी स्थिति में छिपे फायदे को देखने की कोशिश करेंगे, तो मन शांत होगा। संत ने गाय के जाने को नुकसान नहीं माना, बल्कि समय बचने को लाभ समझा।
- धैर्य बहुत जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय या प्रतिक्रिया अक्सर परेशानी बढ़ा देती है। धैर्य रखने वाला व्यक्ति मुश्किल समय में भी सही सोच बनाए रखता है और हर परेशानी का समाधान खोज लेता है।
- अपेक्षाएं सीमित रखें। जब हमारी उम्मीदें बहुत ज्यादा हो जाती हैं, तो कुछ उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं, उम्मीदें टूटने पर दुख भी ज्यादा होता है। संत ने न तो गाय मिलने पर ज्यादा खुशी दिखाई और न ही जाने पर दुख। यही संतुलन जीवन को सहज बनाता है।
- हर परेशानी में एक अवसर छिपा होता है। जरूरत बस उस अवसर को पहचानने की है। अगर हम हर परेशानी को अवसर के रूप में देखें, तो जीवन में आगे बढ़ना आसान हो जाता है।
- नकारात्मकता से दूरी बनाए रखें। लगातार शिकायत करने और दुखी रहने से न तो समस्या हल होती है और न ही मन को शांति मिलती है।
- जो लोग बुरे समय में भी सकारात्मकता ढूंढ लेते हैं, वे कभी निराश नहीं होते हैं। वे मानसिक रूप से मजबूत रहते हैं और हमेशा प्रसन्न रहते हैं। सकारात्मक सोच, धैर्य और संतुलन ही एक सफल जीवन का आधार है।
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