6000 KM की रफ्तार, समंदर से सटकर प्रहार, जापान की इस मिसाइल के आगे S-400 चूरन

समंदर की लहरों को चीरता हुआ एक अदृश्य शिकारी जिसकी रफ्तार इतनी खौफनाक है कि रडार पर दिखने से पहले ही तबाही का मंजर सामने होता है! जापान ने अपनी नई Type-25 मिसाइल प्रणाली के रूप में एक ऐसा डिजिटल बाज तैयार किया है जो 6000 किमी/घंटा की तूफानी रफ्तार से सीधे दुश्मन के कलेजे पर वार करता है. यह मिसाइल जब अपनी हाइपरसोनिक ताकत के साथ बाज की तरह झपट्टा मारती है तो दुनिया का सबसे ताकतवर माना जाने वाला S-400 डिफेंस सिस्टम भी कई बार फीका साबित होता है. जमीन और समंदर से सटकर उड़ने वाली यह जापानी तकनीक अब ड्रैगन के हर चक्रव्यूह को भेदने के लिए पूरी तरह तैयार है.

पहली बार चीन की तरफ तैनाती
पूर्वी चीन सागर में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा की बदलती चुनौतियों के बीच जापान ने अपनी रक्षा नीति में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है. 31 मार्च, 2026 को जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) ने आधिकारिक तौर पर दो स्वदेशी स्टैंड-ऑफ मिसाइल सिस्‍टम टाइप-25 सरफेस टू शिप गाइडेड मिसाइल (25SSM) और टाइप-25 हाइपर वेलोसिटी गाइडेड प्रोजेक्‍टाइल (25HGP) के संचालन की घोषणा की. जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजुमी ने इसे जापान की काउंटरस्ट्राइक क्षमता का आधार स्तंभ बताया है. यह पहली बार है जब जापान ने अपनी सीमाओं से दूर दुश्मन को उसकी ही दहलीज पर रोकने (Stand-off Defense) की क्षमता हासिल की है.

क्या है टाइप 25 मिसाइल सिस्टम?
टाइप 25 असल में जापान की उन घातक मिसाइल प्रणालियों का नया नाम है जिन्हें पहले टाइप 12 और हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल के नाम से जाना जाता था. अब इन्हें सेना में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है.

1. टाइप-25 सरफेस टू शिप गाइडेड मिसाइल (25SSM)

· मूल: यह प्रसिद्ध Type 12 मिसाइल का अत्यधिक उन्नत और विस्तारित रेंज वाला संस्करण है.

· रेंज: इसकी मारक क्षमता को पहले के 200 किमी से बढ़ाकर अब 1,000 किमी से 1,200 किमी के बीच कर दिया गया है.

· विशेषता: यह एक लो-ऑब्जर्वेबल (स्टील्थ) मिसाइल है जिसे रडार पर पकड़ना लगभग असंभव है. यह समुद्र की लहरों के बिल्कुल करीब उड़कर दुश्मन के जहाजों को तबाह कर सकती है.

· तैनाती: इसे कुमामोटो प्रान्त के कैम्प केंगन में तैनात किया गया है जो सीधे पूर्वी चीन सागर की ओर नजर रखता है.

2. टाइप-25 हाइपर वेलोसिटी गाइडेड प्रोजेक्‍टाइल (25HGP)

· तकनीक: यह जापान का पहला स्वदेशी हाइपरसोनिक हथियार है. इसे रॉकेट के जरिए वायुमंडल की ऊपरी सतह पर छोड़ा जाता है, जहां से यह अत्यधिक हाई स्‍पीड (Mach 5+) पर दुश्मन के लक्ष्य की ओर ग्लाइड करता है.

· पेलोड: इसमें विशेष आर्मर-पियर्सिंग (कवच भेदने वाले) वारहेड लगे हैं जो द्वीपों पर कब्जा करने वाली दुश्मन सेना और उनके युद्धपोतों के परखच्चे उड़ा सकते हैं.

· तैनाती: इसे शिज़ुओका प्रान्त के कैम्प फुजी में तैनात किया गया है जो एक प्रमुख प्रशिक्षण और रणनीतिक केंद्र है.

क्षमता, कीमत और रणनीतिक महत्व
· पेलोड क्षमता: अनुमानित रूप से ये मिसाइलें 250 से 500 किलोग्राम तक के पारंपरिक हाई-विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम हैं.

· कीमत: जापान ने इन सिस्‍टम के विकास और शुरुआती उत्पादन के लिए अरबों येन का निवेश किया है. एक अनुमान के मुताबिक प्रति मिसाइल लागत लगभग $5 मिलियन से $10 मिलियन (40 से 80 करोड़ रुपये) के बीच हो सकती है जो इनकी तकनीक को देखते हुए काफी प्रतिस्पर्धी है.

· सुरक्षा का घेरा: ये मिसाइलें जापान को सुरक्षा लिफाफे के बाहर से हमला करने की शक्ति देती हैं, जिससे जापानी सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन को रोका जा सके.

सवाल-जवाब
‘स्टैंड-ऑफ’ डिफेंस कैपेबिलिटी का क्या मतलब है?

इसका मतलब है ऐसी सैन्य क्षमता, जिससे कोई देश दुश्मन की मिसाइलों या हथियारों की पहुंच से दूर सुरक्षित दूरी पर रहकर भी उस पर सटीक हमला कर सके.

Type 25 मिसाइलों की तैनाती किन स्थानों पर की गई है और क्यों?

25SSM को कैम्प केंगन (पूर्वी चीन सागर के पास) और 25HGP को कैम्प फुजी में तैनात किया गया है. यह रणनीतिक रूप से चीन की नौसैनिक गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया है.

क्या ये मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं?

नहीं, जापान की ‘शांतिवादी’ नीति के अनुसार ये मिसाइलें केवल पारंपरिक (Conventional) हथियारों के लिए बनाई गई हैं, लेकिन इनकी गति और सटीकता इन्हें परमाणु हथियारों जितना ही प्रभावी बनाती है.

हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल (25HGP) दूसरों से अलग कैसे है?

यह अपनी हाइपरसोनिक गति और दागे जाने के बाद दिशा बदलने की क्षमता के कारण बेजोड़ है. इसे आज के आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए रोकना लगभग नामुमकिन है.

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