रसेल वाइपर का जहर! कभी तुरंत मौत, तो कभी…, वैज्ञानिक अपनी खोज पर हैरान

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Unique Knowledge News: भारत में पाए जाने वाले सबसे खतरनाक सांपों में से एक रसेल वाइपर अब वैज्ञानिकों के लिए भी रहस्य बन गया है. नई स्टडी में पता चला है कि यह सांप मौसम के अनुसार अपने जहर का असर बदल देता है. यानी इसका जहर गर्मी, बारिश और ठंड में अलग-अलग तरह से काम करता है.

खंडवा. रसेल वाइपर, दुनिया के सबसे खतरनाक सांपों में से एक, मौसम के साथ अपना जहर बदल लेता है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि यह सांप गर्म और सूखे इलाकों में ज्यादा घातक जहर छोड़ता है, जबकि नमी वाले क्षेत्रों में इसका असर धीरे-धीरे होता है. वैज्ञानिकों ने भारत के 34 इलाकों से 115 सैंपल लेकर यह शोध किया. इस सांप के काटने से शरीर में ब्लड क्लॉट बनते हैं, जिससे किडनी और लिवर फेल हो जाते हैं. इसलिए इसे “सीजनल पॉइजन स्नेक” भी कहा जा रहा है.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु की इवोल्यूशनरी वेनॉमिक्स लैब ने भारत के 34 अलग-अलग इलाकों से रसेल वाइपर के 115 जहर सैंपल इकट्ठे किए. स्टडी में पाया गया कि सूखे और गर्म इलाकों में रहने वाले रसेल वाइपर का जहर सबसे घातक होता है. उनके जहर में टॉक्सिन की मात्रा अधिक पाई गई, जो इंसान के खून को जमाकर दिल और किडनी फेल कर देता है. वहीं नमी और ज्यादा बारिश वाले इलाकों के वाइपर का जहर उतना तीव्र नहीं होता, लेकिन शरीर को धीरे-धीरे खत्म करता है. इस वजह से वैज्ञानिकों ने इसे “सीजनल पॉइजन स्नेक” नाम दिया है. रसेल वाइपर को भारत में “दबौया सांप” कहा जाता है. यह दक्षिण एशिया के वाइपरिडे परिवार से जुड़ा है और “बिग फोर” यानी भारत के चार सबसे जहरीले सांपों कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर  में शामिल है.

अलग-अलग मौसम में जहर की रासायनिक बनावट भी बदलती है
इसका जहर हेमोटॉक्सिक होता है, जो खून को सीधे प्रभावित करता है. काटने के 15 से 20 मिनट में ही सूजन, दर्द, ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर में गिरावट आने लगती है. बिना इलाज मौत भी हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान, नमी और पर्यावरणीय तनाव के चलते इस सांप के शरीर में मौजूद प्रोटीन बदल जाते हैं. यही कारण है कि अलग-अलग मौसम में जहर की रासायनिक बनावट भी बदलती है.

सूखी झाड़ियां है पसंदीदा, रात में रहता है ज्‍यादा एक्टिव 
रसेल वाइपर आमतौर पर खेतों और सूखी झाड़ियों में पाया जाता है. यह रात में ज्यादा सक्रिय रहता है और खतरा महसूस होते ही तेज फुफकार के साथ हमला करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी “मौसमी जहर बदलने” की क्षमता प्रकृति के अनुकूलन का शानदार उदाहरण है. यही वजह है कि इसे संभालना या इससे बचना बेहद जरूरी है — क्योंकि इसका एक वार जिंदगी और मौत के बीच फर्क पैदा कर सकता है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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