वेस्ट एशिया टेंशन के बीच नहीं थम रही रुपये की गिरावट, डॉलर के मुकाबले फिर निकला दम

Dollar vs Rupee: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी है. अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, यानी बुधवार को, रुपया एक बार फिर तीन पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले 92.43 के स्तर पर पहुंच गया.

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते विदेशी निवेशकों की निकासी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख से घरेलू मुद्रा दबाव में है. विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक शुरुआत ने रुपये में अधिक गिरावट को फिलहाल रोक रखा है.

क्यों टूट रहा है रुपया?

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 92.42 पर खुला और बाद में गिरकर 92.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की गिरावट दर्शाता है. पिछले हफ्ते गुरुवार को कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 92.47 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था.

हालांकि, अंत में यह 92.40 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत बढ़कर 99.60 पर पहुंच गया.

घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 373.53 अंक (0.49 प्रतिशत) बढ़कर 76,444.37 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 114.40 अंक (0.49 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,695.55 अंक पर रहा.

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.32 प्रतिशत गिरकर 102.0 डॉलर प्रति बैरल रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे और उन्होंने 4,741.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, घरेलू मुद्रा में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा लगातार पूंजी निकासी है. हालांकि, घरेलू बाजारों में सुधार और अमेरिकी डॉलर में हल्की नरमी ने रुपये की तेज गिरावट को सीमित किया है.

उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीद और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को निचले स्तर पर सहारा मिल सकता है. साथ ही, निवेशक इस सप्ताह फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी), यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी), बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीतियों पर भी नजर रखेंगे. उनके अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 92.10 से 92.75 रुपये के दायरे में रह सकता है.

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