चंदौली. रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की ग्रुप D परीक्षा देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में इस परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक होती है, ऐसे में सही रणनीति, सटीक रिवीजन और मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है. परीक्षा के अंतिम समय में घबराहट और अनावश्यक तनाव से बचना ही सफलता की पहली कुंजी है.
वी. के. रॉय सर ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि रेलवे में सबसे ज्यादा वैकेंसी ग्रुप D की ही होती है, इसलिए प्रतिस्पर्धा भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है. उम्मीदवारों को यह समझना चाहिए कि इस परीक्षा में पूरे सिलेबस को रटने से ज्यादा जरूरी स्मार्ट स्टडी और सही विषयों पर फोकस करना है.
कठिन लगता है यह सेक्शन
आगे उन्होंने बताया कि यदि ग्रुप D परीक्षा के जनरल साइंस (GS) सेक्शन की बात करें, तो इसमें लगभग 40 प्रश्न होते हैं, जिनमें से 25 प्रश्न साइंस से पूछे जाते हैं. इन 25 प्रश्नों में करीब 10 से 12 प्रश्न बायोलॉजी से आते हैं. इसके अलावा फिजिक्स और केमिस्ट्री से भी सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें फिजिक्स का स्तर कठिन माना जाता है. यही कारण है कि कई छात्रों को यह सेक्शन कठिन लगता है.
इन सब्जेक्ट को दें प्राथमिकता
रॉय सर ने बताया कि वर्तमान परीक्षा पैटर्न को देखें, तो यह पहले की तुलना में काफी बदल चुका है. हर शिफ्ट में लगभग 15 प्रश्न करंट अफेयर्स से पूछे जा रहे हैं, जबकि इतिहास, संविधान और अर्थशास्त्र से कम प्रश्न देखने को मिलते हैं. इसलिए उम्मीदवारों को चाहिए कि वे इतिहास और राजनीति के पीछे जरूरत से ज्यादा समय न लगाकर साइंस और करंट अफेयर्स को प्राथमिकता दें.
इन छात्रों को मिलता है फायदा
वहीं, उन्होंने कहा कि जिन छात्रों का 10वीं–12वीं में साइंस बैकग्राउंड रहा है, वे इस परीक्षा में अधिक सफल देखे जा रहे हैं. खासकर बायोलॉजी और फिजिक्स की बुनियादी समझ रखने वाले छात्रों को फायदा मिलता है. यदि छात्र 10वीं स्तर की साइंस को अच्छे से समझ लेते हैं, तो आगे के प्रश्नों को हल करना उनके लिए आसान हो जाता है.
बदल चुका है परीक्षा का पैटर्न
वी. के. रॉय सर ने बताया कि ग्रुप D परीक्षा की तैयारी का सबसे बड़ा नियम यह है कि पूरा सिलेबस एक साथ कवर करने की जल्दबाजी न करें. बेहतर होगा कि 8–10 महीनों में सिलेबस पूरा कर लिया जाए और उसके बाद पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का गहन अभ्यास किया जाए. खासतौर पर 2010 से 2020 के बाद आए प्रश्नों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि परीक्षा का पैटर्न समय के साथ बदल चुका है.
प्रैक्टिस टेस्ट देना है बेहद जरूरी
वहीं, रॉय सर ने बताया कि डेली मॉक टेस्ट और फुल लेंथ प्रैक्टिस टेस्ट देना बेहद जरूरी है. टाइमर लगाकर परीक्षा जैसी स्थिति में प्रश्न हल करने से समय प्रबंधन बेहतर होता है. यदि संभव हो तो कंप्यूटर सेंटर पर जाकर सिस्टम पर प्रैक्टिस करें, क्योंकि कई छात्र कंप्यूटर आधारित परीक्षा में सहज नहीं हो पाते. परीक्षा से पहले अच्छी नींद लें, केवल परिचित टॉपिक्स का ही रिवीजन करें और अंतिम समय में कुछ नया पढ़ने से बचें. शांत मन, सही रणनीति और लगातार अभ्यास ही RRB ग्रुप D परीक्षा में सफलता का सबसे मजबूत आधार है.
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