Health Tips: विंध्य क्षेत्र में पुराने समय के लोग ज्वार (जोन्हरी) की रोटी खाया करते थे और बहुत मजबूत होते थे. लेकिन समय बदलने के साथ गेहूं ने उनकी थाली में जगह ले ली और धीरे-धीरे फिटनेस, पाचन और ऊर्जा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगीं. अब विशेषज्ञ फिर से उसी देसी अनाज ज्वार की ओर लौटने की सलाह दे रहे हैं. वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. परौहा ने जानकारी देते हुए बताया कि रात में भारी भोजन शरीर को नुकसान पहुंचाता है और पेट की चर्बी बढ़ाता है. लेकिन अगर गेहूं की जगह ज्वार की रोटी शामिल कर ली जाए, तो पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक हर स्तर पर बेहतरीन फायदा मिलता है.
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