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बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई परेशानियां भी लेकर आता है. कई घरों में बारिश का पानी अंदर घुस जाता है, दीवारों पर सीलन लग जाती है, और कुछ घरों की छत लगातार टपकने लगती है. ऐसे में घर के छत और दीवारों की लीकेज को ठीक करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि न सिर्फ घर सुरक्षित रहे बल्कि पानी के कारण होने वाले नुकसान से भी बचा जा सके.
बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई परेशानियां भी लेकर आता है. कुछ घरों में बारिश का पानी घुस जाता है, तो कुछ घरों की दीवारों पर पानी के कारण सीलन लग जाती है. वहीं, कई लोग टपकती छत की समस्या से भी परेशान रहते हैं.

लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद भी घरों में पानी टपकना बंद नहीं होता. यह समस्या अब सिर्फ गांव या छोटे शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मेट्रो सिटी के घरों में भी देखने को मिलती है. बारिश के मौसम में अच्छा खासा लेंटर भी टपकने लगता है, और इसी टपकते पानी के कारण दीवारों पर सीलन भी लगनी शुरू हो जाती है.

अगर आपके घर की छत से पानी टपक रहा है तो आप पेट्रोल और थर्मोकोल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए थर्मोकोल को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर चूरा बना लें और इसे थोड़े से पेट्रोल में डाल दें. पेट्रोल में डालने के बाद थर्मोकोल घुलकर पेस्ट जैसी स्थिति में आ जाएगा.

अगर आप चाहते हैं कि बारिश के मौसम में छत या दीवार से पानी न टपके, तो मौसम शुरू होने से पहले ही दीवारों की बाहरी परतों का ध्यान रखना जरूरी है. दीवार में मौजूद सभी लीकेज को ठीक करने के लिए हर 4-5 साल में वॉटरप्रूफ कोटिंग से पेंट करवाएं. ऐसा करने से बारिश के मौसम में दीवारें न सिर्फ सुरक्षित रहेंगी बल्कि पानी भी अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश नहीं कर पाएगा.

यदि दीवारें नम या गीली हैं, तो सबसे पहले दरारों और छेदों की अच्छी तरह से जांच करें. खासकर दरवाजों और खिड़कियों के पास की दरारों पर ध्यान दें, क्योंकि यहां नमी अधिक जमती है और दीवार को नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसी दरारों पर क्रैक-फिल पुट्टी (crack-fill putty) लगाकर उन्हें भरें, जिससे नमी अंदर न जा सके और दीवार लंबे समय तक सुरक्षित रहे.

छोटी दरारों के लिए सबसे पहले उन्हें सीमेंट से भरें. जब सीमेंट पूरी तरह सूख जाए, तब उसके ऊपर पेंट कर दें. इससे काफी हद तक लीकेज की समस्या खत्म हो जाती है. नए घर बनवाते समय ही वाटरप्रूफ सीमेंट और वाटरप्रूफ टाइल्स का इस्तेमाल करें, ताकि दीवारें और छत नमी से खराब न हों.
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