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माइक्रोप्लास्टिक आज पानी, खाने और हवा के जरिए हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में सेहत पर असर पड़ सकता है. इतना ही नहीं हालिया स्टडी में ये भी सामने आया है कि पिता के माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आने से बेटियों में मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने पर्यावरण और आने वाली पीढ़ी की सेहत के बीच एक नया और चिंताजनक संबंध दिखाया है. इस रिसर्च के अनुसार, अगर पिता माइक्रोप्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में आते हैं, तो उनकी बेटियों में डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
यह अध्ययन दिसंबर 2025 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड (यूसी रिवरसाइड) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया और ‘जर्नल ऑफ द एंडोक्राइन सोसाइटी’ में प्रकाशित हुआ है. हालांकि यह रिसर्च चूहों पर की गई, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके नतीजे इंसानों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देते हैं.
माइक्रोप्लास्टिक क्या हैं?
माइक्रोप्लास्टिक बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जिनका आकार 5 मिलीमीटर से भी कम होता है. ये उपभोक्ता उत्पादों, प्लास्टिक कचरे और औद्योगिक गतिविधियों से बनते हैं. पहले ही यह साबित हो चुका है कि माइक्रोप्लास्टिक इंसानों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम तक पहुंच चुके हैं.
स्टडी में क्या पाया गया
इस स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों को हाई-फैट डाइट दी, जिससे उनमें मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसे हाई ब्लड शुगर, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर और शरीर में ज्यादा फैट पैदा हो सके. इसके बाद यह देखा गया कि जिन चूहों के पिता माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में थे, उनकी संतानों पर इसका क्या असर पड़ा.
बेटियों पर ज्यादा दिखा असर
नतीजों से पता चला कि असर बेटियों पर ज्यादा दिखा. हाई-फैट डाइट पर रखी गई बेटियों में इंसुलिन रेसिस्टेंस विकसित हो गया, जो डायबिटीज का शुरुआती संकेत है. इंसुलिन इंजेक्शन के बाद भी उनका ब्लड शुगर जल्दी कम नहीं हुआ. इसके अलावा, उनके लिवर में सूजन बढ़ी, डायबिटीज से जुड़े जीन ज्यादा सक्रिय हुए और मांसपेशियों की ताकत कम हुई. स्टडी में बेटों में डायबिटीज जैसे लक्षण नहीं पाए गए. हालांकि, उनके शरीर में फैट मास थोड़ा कम देखा गया. कुल मिलाकर, माइक्रोप्लास्टिक का नकारात्मक प्रभाव लड़कियों में ज्यादा था.
वैज्ञानिकों की चेतावनी
इस अध्ययन के लीड ऑथर और यूसी रिवरसाइड स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर चांगचेंग झोउ ने कहा कि यह रिसर्च दिखाती है कि माता-पिता, खासकर पिता का पर्यावरणीय संपर्क, बच्चों की सेहत को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने बताया कि इस लिंग-विशिष्ट असर के कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. झोउ ने यह भी कहा कि जो पुरुष भविष्य में पिता बनने की योजना बना रहे हैं, उन्हें माइक्रोप्लास्टिक जैसी हानिकारक चीजों के संपर्क को कम करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि अपनी और आने वाली पीढ़ी की सेहत की रक्षा की जा सके.
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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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