प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में आई क्रांति, अब एक घंटे में होगा सफल ऑपरेशन

नई दिल्ली: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला सबसे आम कैंसर है. देशभर में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले यह 50 से 70 साल के बीच में होता था, लेकिन अब 50 साल से कम उम्र के पुरुषों में भी हो रहा है. सबसे अच्छी बात यह है कि अब इस प्रोस्टेट कैंसर का सटीक और आसान इलाज दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर संस्थान ने खोज निकाला है.

जहां पर प्रोस्टेट कैंसर मरीज का 4 घंटे में इलाज हो जाएगा. अगले दिन मरीज अपने घर जा सकता है. इस इलाज के जरिए मरीज में कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है. प्रोस्टेट कैंसर के इस नए इलाज का नाम है हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (HIFU) जिसके जरिए प्रोस्टेट कैंसर का इलाज अब आसान हो गया है.

संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर ने बताया

राजीव गांधी कैंसर संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर सुधीर कुमार रावल ने खास इंटरव्यू में बताया कि प्रोस्टेट कैंसर जितना जल्दी पता लग जाए, उतना जल्दी इसका इलाज किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी अभी तक होती आई है. इसके दुष्प्रभाव भी होते हैं और एक बार इसे करवा लिया तो दूसरे किसी भी ट्रीटमेंट का अवसर मरीज के पास नहीं बचता है. वहीं, हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड से इलाज में कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है. इसके बाद भी मरीज हार्मोन थेरेपी, रेडियोथैरेपी या सर्जरी करवा सकता है.
ऐसे काम करती है ये मशीन

राजीव गांधी कैंसर संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर सुधीर कुमार रावल ने बताया कि हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड के जारी मरीज के प्रोस्टेट कैंसर सेल्स को अल्ट्रासाउंड किरणों के जरिए मारा जाता है. यानी खत्म किया जाता है. इसमें उच्च-तीव्रता वाली अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग करके शरीर के अंदर मौजूद कैंसर सेल्स को गर्म करके मारा जाता है. लगभग 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान होता है. 4 घंटे का यह पूरा ट्रीटमेंट चलता है और अगले दिन मरीज अपने घर जा सकता है.

इसका अभी तक कोई भी दुष्प्रभाव देशभर में नहीं देखा गया है. 2010 से इसी तकनीक के जरिए प्रोस्टेट कैंसर का इलाज किया जा रहा है. पूरे देश भर में राजीव गांधी कैंसर संस्थान ने सबसे पहले इस मशीन के जरिए इलाज शुरू किया था. 2024 में जब यह मशीन और मॉडिफाई होकर आई तो भी इकलौती इस मशीन के जरिए प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करना सिर्फ राजीव गांधी कैंसर संस्थान ने ही शुरू किया. उन्होंने बताया कि इससे मरीजों को काफी फायदा हो रहा है. क्योंकि कोई दुष्प्रभाव इससे नहीं होते हैं.

जानें कितनी है मशीन की कीमत

उन्होंने बताया कि इस तकनीक के जरिए एक बार की पूरी कीमत 6 लाख रुपए है, लेकिन यह बेहद कम है. प्रोस्टेट कैंसर में जब मरीज हार्मोन, थेरेपी रेडियोथैरेपी या सर्जरी लेता है तो उसे कई दौर से गुजरना पड़ता है, जिस वजह से उसका इलाज इससे ज्यादा या इतनी ही कीमत तक पहुंच जाता है और इन सब के कुछ दुष्प्रभाव होते हैं. जैसे पेशाब पर इंसान का कंट्रोल नहीं रह जाता है. यौन शक्ति में भी कमी आ जाती है. कई तरह की दिक्कतें होती हैं. जबकि अल्ट्रासाउंड के जरिए प्रोस्टेट कैंसर के इस तकनीक में पेशाब पर कंट्रोल बना रहता है. यौन शक्ति में कमी नहीं आती है और किसी भी तरह के कोई दुष्प्रभाव मरीज को नहीं होते हैं.

प्रोस्टेट कैंसर के ये होते हैं लक्षण

1-बार-बार पेशाब आना पेशाब में खून आना

2- पेशाब में रुकावट हो जाना

3- पेशाब जैसा महसूस होता है लेकिन पेशाब होती नहीं है.

4- पेशाब करते समय दर्द होना

ये जांच जरूर करवाएं

मेडिकल डायरेक्टर राजीव गांधी कैंसर संस्थान के डॉ. सुधीर ने बताया कि 50 साल से लेकर 70 साल की उम्र के बीच यह बीमारी बहुत आम है. पुरुषों में होने वाला सबसे आम कैंसर है, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए महत्वपूर्ण है प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांच, इस जांच के बाद पता चल जाता है कि प्रोस्टेट कैंसर है या नहीं. जितनी जल्दी जांच कर लेंगे उतनी जल्दी इलाज शुरू हो जाएगा.

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