वैश्विक बाजार में कच्चे तेल को लेकर इस समय उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और निवेशकों की नजरें पूरी तरह मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं। इसी बीच शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसने बाजार में कुछ राहत का माहौल जरूर बनाया है।
बता दें कि यह गिरावट उस समय देखने को मिली जब बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान देते हुए कहा कि ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है और यह संघर्ष उम्मीद से पहले खत्म हो सकता है। उनके इस बयान के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर बनी चिंता थोड़ी कम हुई है।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी बाजार को राहत दी, जिसमें उन्होंने कहा कि इज़राइल अब ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना नहीं बनाएगा। मौजूद जानकारी के अनुसार इससे खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित बड़े खतरे को लेकर चिंता कुछ हद तक कम हुई है।
हालांकि, यह भी सच है कि संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि दुनिया की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जबकि कुछ समय पहले यह 119 डॉलर तक पहुंच गई थीं। वहीं गैस की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया।
गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी पड़ा है। कई बड़े बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन पर इसके असर को लेकर चिंतित हैं। हालांकि कुछ एशियाई बाजारों में सीमित तेजी भी देखने को मिली।
बताते चलें कि विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध जल्द खत्म हो जाए, लेकिन ऊर्जा ढांचे को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा। ऊर्जा सप्लाई, परिवहन और भरोसे को फिर से बहाल करना आसान नहीं होता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी इस मुद्दे पर पहल करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ढांचा तैयार करने की बात कही है, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर देखा जाए तो फिलहाल बाजार में थोड़ी राहत जरूर आई है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
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