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How to rebuild broken relationships: नया साल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है, बल्कि जीवन को एक नई शुरुआत करने का भी मौका होता है. आप इसके बहाने टूटे या छूट चुके रिश्तों को फिर से जोड़ने का एक नया मौका मान सकते हैं. कई बार हम गलतफहमियों, गुस्से या अहंकार की वजह से कई रिश्तों से खुद को अलग कर लेते हैं. ऐसे में साल का पहला दिन हमें अपने रिश्तों को नए सिरे से देखने का मौका देता है, जिससे हम उन्हें दोबारा जोड़ने की कोशिश कर सकें.
<strong>New Year Resolutions For Relationships:</strong> आज की जिंदगी में क्यों बढ़ रही है रिश्तों की दूरी? आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग जल्दी आहत हो जाते हैं और उतनी ही जल्दी दूरी बना लेते हैं. छोटी-छोटी बातों पर बातचीत बंद हो जाता है और बात मन में दबती चली जाती है. समय के साथ यही चुप्पी दीवार बन जाती है. नया साल इस दीवार में एक दरार डाल सकता है, बशर्ते हम पहला कदम उठाने की हिम्मत करें.

<strong>माफ़ी यानी रिश्तों को जोड़ने की पहली सीढ़ी-</strong> रिश्तों को जोड़ने की शुरुआत अक्सर माफ़ी से होती है. माफ़ी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि भावनात्मक समझदारी की निशानी है. जब आप सच्चे दिल से ‘सॉरी’ कहते हैं, तो सामने वाले को यह एहसास होता है कि वह आपके लिए मायने रखता है. कई बार एक छोटा सा माफ़ी भरा मैसेज या कॉल महीनों की खामोशी तोड़ सकता है.

<strong>शब्द नहीं, माफ़ी के पीछे का भाव ज़रूरी-</strong> हालांकि माफ़ी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उसके पीछे का पछतावा और बदलाव की इच्छा भी होनी चाहिए. अगर पुरानी गलती दोहराई जाती है, तो भरोसा फिर से टूट सकता है. इसलिए नए साल में माफ़ी के साथ यह प्रॉमिस भी करें कि आप अपनी गलतियों से सीखेंगे और रिश्ते को बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे.
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<strong>खुलकर बातचीत ही रिश्तों की सबसे मजबूत दवा-</strong> माफ़ी के बाद अगला अहम कदम है बातचीत. खुलकर बात करना रिश्तों की सबसे मजबूत दवा है. अपनी बात शांत तरीके से रखें और सामने वाले की बात भी ध्यान से सुनें. बातचीत का मकसद बहस में जीतना नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझना होना चाहिए. इससे गलतफहमियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं.

<strong>डर नहीं, सच बोलने की हिम्मत दिखाएं-</strong> कई लोग डरते हैं कि बातचीत करने से पुरानी बातें फिर उभर आएंगी. लेकिन सच यह है कि दबाई गई बातें कभी खत्म नहीं होतीं. सही समय पर, सही लहजे में की गई बातचीत रिश्ते को हल्का और मजबूत बनाती है. नया साल इस डर को पीछे छोड़ने और ईमानदार संवाद शुरू करने का सही मौका है.

<strong>धैर्य रखें, हर जख्म को भरने में समय लगता है-</strong> अगर सामने वाला तुरंत प्रतिक्रिया न दे, तो धैर्य रखें. हर व्यक्ति को अपने जख्म भरने में अलग समय लगता है. बार-बार दबाव बनाने के बजाय उन्हें स्पेस दें और अपने व्यवहार से यह दिखाएं कि आप वाकई रिश्ते को सुधारना चाहते हैं. समय के साथ सकारात्मक कोशिशें असर दिखाने लगती हैं.

आखिर में, नया साल हमें यह सिखाता है कि जिंदगी बहुत छोटी है और रिश्ते बहुत कीमती. टूटे रिश्तों को जोड़ना आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. माफ़ी और बातचीत की ताकत से कई बिछड़े दिल फिर करीब आ सकते हैं. इस नए साल पर संकल्प लें कि अहंकार नहीं, इंसानियत और समझदारी को चुनेंगे.
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