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13 मिनट पहले
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सवाल: मेरी उम्र 35 साल है और मैं दिल्ली में रहती हूं। मैं सिंगल मदर होम में बड़ी हुई। पापा की डेथ बहुत बचपन में ही हो गई थी। मेरी शादी को 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं। हसबैंड मुझसे उम्र में 12 साल बड़े हैं। हमारा 8 साल का एक बेटा है। कॉलेज में ही हमारी मुलाकात हुई थी। मैं ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में थी और ये पीएचडी कर रहे थे। 24 साल की उम्र में मैंने शादी कर ली। उस वक्त सबने बहुत समझाया कि इतना ज्यादा एज गैप आगे चलकर परेशानी बनेगा, लेकिन तब मैं इन बातों को समझ नहीं पाई।
लेकिन अब शादी के 12 साल बाद लगने लगा है कि हम दोनों जिंदगी से बहुत अलग चीजें चाहते हैं। मैं भी शायद अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी हो गई। इस एज गैप के कारण हमारी इच्छाएं, जरूरतें, एनर्जी कुछ भी मैच नहीं करते। मैं यंग लड़कों को देखती हूं तो उनके प्रति एक अजीब सा आकर्षण महसूस होता है। जब अपनी उम्र के और यंग कपल्स को देखती हूं तो थोड़ी ईर्ष्या भी होती है। शादी मैंने अपनी मर्जी से की थी, लेकिन अब ये शादी घुटन बन गई है। तलाक लेने की हिम्मत नहीं है। साथ रहना भी आसान नहीं है। मैं क्या करूं?
एक्सपर्ट: जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, दिल्ली
जवाब: सबसे पहले तो आपकी फीलिंग्स को मैं पूरी तरह से समझती हूं। 35 साल की उम्र में जब आप पीछे मुड़कर देखती हैं, तो लगता है कि शादी का वो फैसला अब भारी पड़ रहा है। एज गैप वाली शादियां शुरू में तो रोमांचक लगती हैं, लेकिन समय के साथ लाइफ स्टेज के फर्क से परेशानियां आती हैं। आपका बचपन भी आसान नहीं था, पिता का साया जल्दी छिन जाना एक रिक्त स्थान छोड़ जाता है। ये आकर्षण, ईर्ष्या की भावनाएं… ये सब सामान्य हैं, लेकिन इन्हें दबाने से समस्या बढ़ती है। चलिए, इसे समझते हैं।
खुद को दोष मत दीजिए
आपने लिखा कि शादी अपनी मर्जी से की है, लेकिन अब घुटन महसूस होती है। सबसे पहले खुद को दोष देना बंद कर दीजिए। 24 साल की उम्र में आप इमोशनल थीं, कॉलेज का रोमांस था और पिता की कमी के कारण शायद आपको बड़े उम्र के पार्टनर में वो सुरक्षा और मार्गदर्शन महसूस हुआ जो बचपन में नहीं मिला। ये कोई गलती नहीं, बल्कि जीवन का एक हिस्सा है। सोचिए, एक पेड़ को अगर शुरुआत में मजबूत जड़ें न मिलें, तो वो तेज हवा में झुक जाता है। कई बार टूट भी जाता है। आपका बचपन भी लगभग वैसा ही था। आप और आपकी मां बहुत मजबूत हैं, दोनों ने इतना लंबा सफर तय किया है।

पिता की कमी से रिश्ते प्रभावित होते हैं
आपके पिता की जल्दी मौत ने शायद आपको अनजाने में ऐसे रिश्तों की तरफ खींचा, जहां परिपक्वता और सुरक्षा मिले। मनोविज्ञान में इसे ‘फादर वाउंड’ कहते हैं, जब बचपन में पिता का साथ न मिले, तो बड़े होकर लोग अक्सर बड़े उम्र के पार्टनर चुनते हैं, क्योंकि वो पिता जैसा स्नेह और गाइडेंस देते लगते हैं। लेकिन समय के साथ ये फर्क दिखने लगता है।

एज गैप रिश्ते को कैसे प्रभावित करता है?
मान लीजिए आप तेज रफ्तार वाली कार में सवार हैं, लेकिन आपका पार्टनर आराम से साइकिल चला रहा है। बड़े एज गैप वाली शादियों में यही होता है। शुरुआती सालों में संतुष्टि ज्यादा होती है, क्योंकि छोटे पार्टनर को परिपक्वता आकर्षित करती है। लेकिन 5-10 साल बाद, जैसे आपकी शादी में फर्क दिखने लगता है। एनर्जी लेवल मैच नहीं करता, इच्छाएं अलग हो जाती हैं। रिसर्च से पता चलता है कि 3 साल से ज्यादा एज गैप में डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है, और रिश्ता कम संतोषजनक लगने लगता है।

आकर्षण अपराध नहीं, स्वाभाविक है
आपने यंग लड़कों की तरफ आकर्षण और समान उम्र के कपल्स पर ईर्ष्या का जिक्र किया। इसे लेकर खुद को दोषी मत मानिए। ये कोई पाप नहीं, बल्कि मानवीय स्वभाव है। जब रिश्ते में एनर्जी मैच नहीं करती, तो मन बाहर की तरफ खिंचता है। सोचिए, अगर आपका फोन पुराना हो जाए, तो नए मॉडल को देखकर मन ललचाता है। ये वैसा ही है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप बुरे इंसान हैं। ये सिर्फ संकेत है कि आपकी कुछ जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। जिन महिलाओं को पिता का बहुत प्यार नहीं मिला, वो अक्सर ऐसे रिश्तों में फंसती हैं जहां वो भावनात्मक रूप से संतुष्ट नहीं होतीं और बाहर आकर्षण महसूस करती हैं। इसे स्वीकार कीजिए, लेकिन एक्शन लेने से पहले सोचिए।
तलाक अच्छा विकल्प नहीं है
आप कहती हैं कि तलाक की हिम्मत नहीं है। अच्छा है, क्योंकि रिश्ता एब्यूजिव नहीं लग रहा है। तलाक बड़ा फैसला है, यह बच्चे के लिए भी अच्छा नहीं होगा। अगर पति एब्यूजिव या हिंसक होते, तो अलग बात होती। लेकिन यहां फर्क है, जो ठीक किया जा सकता है। एज गैप कपल्स में अगर कम्युनिकेशन अच्छा है तो रिश्ता लंबा चलता है। तलाक तभी सोचिए जब साथ रहना असंभव लगे।
अब क्या करें?
हम इसके व्यावहारिक रास्ते देख सकते हैं। रिश्ते को बचाने या खुद को खुश रखने के लिए ये कदम उठाएं।

अपनी जरूरतों को पहचानें: क्या आपको घूमना, दोस्तों से मिलना पसंद है। अगर ऐसा है तो इनके लिए पार्टनर पर डिपेंड मत रहिए। कुछ चीजें दोस्तों के साथ ट्राई करें।
पति से खुलकर बात करें: उन्हें शांति से बताएं कि मुझे लगता है हमारी एनर्जी अलग है, क्या हम साथ कुछ नया ट्राई करें। हो सकता है वो समझें और साथ दें।
अपनी पहचान दोबारा खोजें: शादी से पहले क्या पसंद था? पढ़ना, डांसिंग? अब शुरू करें। ये आपको मजबूत बनाएगा।
अपराधबोध छोड़ें: ईर्ष्या और आकर्षण नॉर्मल हैं। इन्हें जर्नल में लिखें, समझें।
रिश्ते में ताजगी लाएं: सरप्राइज डेट्स, ट्रैवल प्लान। अगर नहीं बनती है तो काउंसलिंग लें।
प्रोफेशनल मदद लें: कपल थेरेपी से एज गैप को हैंडल किया जा सकता है।
खुद के प्रति करुणा रखना सीखें
आपकी सबसे बड़ी समस्या खुद पर गुस्सा करना है। आपको बार-बार लगता है कि गलत फैसला लिया। लेकिन याद रखिए, उस वक्त आपको जो सबसे अच्छा लगा, आपने वो किया। खुद के साथ उतनी ही करुणा रखिए, जैसे किसी दोस्त के साथ रखतीं। सेल्फ-कम्पैशन से मेंटल हेल्थ बेहतर होती है और रिश्ते सुधरते हैं।

जीवन में सबकुछ हमारे पक्ष में नहीं होता
जीवन में सब कुछ हमें नहीं मिलता, और यही इसकी खूबसूरती भी है। कुछ चीजें हमें ऐसे स्वीकार करनी पड़ती हैं कि ये हमें नहीं मिलना था। इसके कई कारण हो सकते हैं, हमारी जिंदगी, हमारी चॉइस, हमारी समझ। हां, चुनौतियां होंगी, लेकिन अपनी खुशियों को खोजने का हक हमेशा आपके पास है। रिश्तों, सपनों और अपनी इच्छाओं में संतुलन बनाइए। जरूरी हो तो काउंसलिंग लें। याद रखिए, खुशी बाहर नहीं, आपके भीतर है। आप मजबूत हैं और जो मुश्किलें पहले पार कर चुकी हैं, उन्हें अब भी पार कर लेंगी।
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