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42 मिनट पहले
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सवाल- मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। 2 साल का बच्चा है। बीते कुछ दिनों से मेरे भीतर अजीब सा अलगाव पैदा हो रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने पिछले कुछ सालों में अपने लिए कुछ किया ही नहीं है। अब मुझे अकेले रहना ज्यादा अच्छा लगता है।
जब मैं ये बात हसबैंड से शेयर करती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उनसे दूर जाना चाहती हूं। वो मुझे समझ ही नहीं पा रहे हैं। मुझे डर है कि कहीं हमारी केमिस्ट्री न खराब हो जाए। क्या रिश्ते में स्पेस मांगना गलत है? मुझे क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब- मैं अपने जवाब की शुुरुआत एक फिल्म से करना चाहूंगी। एक जॉर्जियन फिल्म है, “माय हैप्पी फैमिली।” इसमें एक शादीशुदा, भरे–पूरे परिवार वाली महिला आपकी ही तरह पर्सनल स्पेस चाहती है। थोड़ा अकेले रहना, थोड़ा अपने साथ वक्त बिताना, थोड़ा खुद से बातें करना।
सोचिए, हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
भारतीय समाज की मुश्किलें
मुश्किल ये है कि हमारे समाज ने खुद के बारे में सोचने को स्वार्थ से जोड़ दिया है। महिलाओं के लिए तो ये और भी मुश्किल है। अगर कोई महिला कहती है कि उसे अकेले रहना अच्छा लगता है या उसे थोड़ा स्पेस चाहिए तो उस पर तुरंत सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। क्या रिश्ता ठीक नहीं है? क्या शादी में प्यार कम हो गया है? क्या पति से दूर जाना चाहती हो?
जबकि सच्चाई यह है कि खुद के लिए समय मांगना, खुद को समझना, खुद के साथ रहना, ये सब रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं, उसे बचाने के लिए की गई कोशिशें हैं।
शादी का मतलब ‘सेल्फ’ का मर जाना नहीं
हमारे समाज और संस्कृति में शादी की बुनियादी परिभाषा ही गलत है। हमें लगता है कि शादी होने का मतलब है, अब महिला की अपनी कोई निजता नहीं रह गई है। उसकी पहचान ही यही है कि वो पत्नी है, मां है, बहू है। लेकिन वो एक इंसान नहीं है, जो आजादी और एजेंसी चाह सकती है।
शादी और उसमें भी खासतौर पर छोटे बच्चों की जिम्मेदारी बहुत डिमांडिंग जॉब है। अमूमन औरतों को उतनी मदद नहीं मिलती, जिसकी उन्हें जरूरत है। इन और ऐसे ही तमाम कारणों से अक्सर शादी में दूरियां आ जाती हैं।

खुद को जानना है जरूरी
इस दुनिया में हर इंसान का अपना अस्तित्व होता है। यहां पर अस्तित्व यानी “मैं कौन हूं, मुझे क्या अच्छा लगता है, मुझे किस चीज से खुशी मिलती है।” यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया का हर रिश्ता इसके बाद ही आता है। भले ही वह रिश्ता पति-पत्नी का हो, माता-पिता का हो या मां-बच्चे का।
अगर कोई इंसान अंदर से खुश नहीं है, संतुष्ट नहीं है, तो वह रिश्तों में भी खुशी नहीं बांट सकता है।

स्पेस मांगने में गिल्ट क्यों?
अपने लिए स्पेस मांगते हुए बिल्कुल भी संकोच या गिल्ट नहीं फील करना चाहिए। यह अकेलेपन की मांग नहीं, खुद के लिए स्पेस की चाहत है। रिश्ते में स्पेस मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पति से दूर जाना चाहती हैं। इसका मतलब यह है कि आप खुद के करीब आना चाहती हैं। यह फर्क समझना बहुत जरूरी है।
पर्सनल स्पेस में इंसान अपने इमोशंस को बेहतर ढंग से प्रोसेस करना सीखता है। वह खुशी और दुख को पहचानकर उनसे डील करना सीखता है। नकारात्मकता और एंग्जाइटी से निपटना सीखता है। इसका सकारात्मक असर उसके सभी रिश्तों पर पड़ता है। पर्सनल स्पेस के फायदे ग्राफिक में देखिए-

कंपैशन और जिम्मेदारी से कहें अपनी बात
बहुत मुमकिन है कि जब आप अपने हसबैंड से ये बात शेयर करेंगी तो उन्हें लगे कि आप उनसे दूर जाना चाहती हैं। यह उनकी गलतफहमी हो सकती है, लेकिन उनकी अपनी भावनाएं भी जायज हैं।
इसलिए ऐसे मामले में बातचीत बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए। ऐसी बातें भावनाओं में बहकर नहीं, समझदारी और थोड़ी डिप्लोमेसी के साथ करनी चाहिए। डिप्लोमेसी का मतलब चालाकी से नहीं, बल्कि सही भाषा से है।
हसबैंड से पूछें ये सवाल
- क्या आपने कभी खुद के लिए समय निकाला है?
- क्या आप दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं?
- क्या आप क्रिकेट देखते हैं, अपने शौक पूरे करते हैं?
- क्या आप यह सब करते हुए खुद को कम पति या कम पिता (पति या पिता का कम दायित्वबोध) महसूस करते हैं?
जब वह इन सवालों का जवाब देंगे तो उन्हें धीरे-धीरे समझ आएगा कि जैसे उन्हें अपने तरीके से रिचार्ज होने का हक है, वैसे ही आपको भी हक है। यह तुलना नहीं, जरूरी उदाहरण है।
असली समस्या न भूलें
बात करते हुए यह न भूलें कि असल समस्या क्या है। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि अगर आप खुद को नहीं संभालेंगी तो आगे चलकर इसका असर रिश्ते पर पड़ सकता है। बताएं कि आपको इसी बात का डर है।
यहां ये समझना भी जरूरी है कि जब आप स्पेस मांगेंगी तो सामने वाला इंसान असहज हो सकता है। कुछ लोग इसे समझते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अपने इगो पर ले लेते हैं।
यह भी संभव है कि आपके पति साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगें, आपसे बात करना कम कर दें, इंटिमेसी से दूरी बनाने लगें। आपको यह जताने लगें कि जैसे उन्हें आपकी जरूरत ही नहीं है।
मानसिक रूप से तैयार रहें
पति के इस तरह के रिएक्शंस उनकी अपनी असुरक्षा के कारण हो सकते हैं। उन्हें यह डर हो सकता है कि उनका आप पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। इसलिए जरूरी है कि आप मानसिक रूप से तैयार रहें कि शुरुआत में सब कुछ स्मूद नहीं होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं।
यहां आपको इमोशनल नहीं, लॉजिकल रहना पड़ेगा। अगर वो आपसे कहें कि तुम ऐसा करोगी तो घर में सबकुछ बिगड़ जाएगा तो आप पूछ सकती हैं, कैसे बिगड़ेगा?
उनके सवालों के हल बताएं
भावनात्मक समस्याओं का समाधान रोना-धोना नहीं, बल्कि ठोस और एक्शन-ओरिएंटेड प्लान होता है। आप कुछ ऐसा प्लान कर सकती हैं, जिससे बच्चे की बेहतर देखरेख हो सके। जैसे उसके लिए नैनी रख सकती हैं या बच्चे की दादी-नानी को घर बुला सकती हैं।
अगर वह कहें कि “तुम्हारे इस फैसले से बच्चे की देखरेख पर असर पड़ेगा” तो आप बता सकती हैं कि “जब मैं खुश रहूंगी तो बच्चा भी ज्यादा सुरक्षित महसूस करेगा।”

आपका डर जायज है
आपको लग रहा है कि कहीं आपके और आपके पति के बीच की केमिस्ट्री खराब न हो जाए। लेकिन आपको ये भी समझना होगा कि अगर आप खुद ही अंदर से परेशान, थकी हुई रहेंगी या घुटन महसूस करेंगी तो इसके नाकारात्मक असर होंगे। इसका असर सिर्फ इस रिश्ते पर ही नहीं, बल्कि आपकी जिंदगी के हर काम पर पड़ेगा। इसलिए सबसे जरूरी है कि आप पहले खुद के साथ अपने रिश्ते को समझें, उसे समय दें और मजबूत बनाएं…।
खुद के लिए स्पेस जरूरी
अब बात करते हैं कि पर्सनल स्पेस का मतलब क्या है। स्पेस का मतलब घर छोड़कर जाना नहीं है। यह छोटी-छोटी चीजों से शुरू होता है। जैसे सुबह अकेले कॉफी पीना, किताब पढ़ना, वॉक पर जाना या कोई हॉबी शुरू करना। बच्चे के साथ रहते हुए भी आप खुद के लिए समय निकाल सकती हैं। जब बच्चा सोता है, तो आप योग करें या म्यूजिक सुनें। पति से मदद मांगें, कभी वह बच्चे को संभालें, आप बाहर घूमकर आएं।

इस बीच खुद का ख्याल रखें
इस तरह की मुश्किल से गुजरते हुए खुद का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। इस फेज में आप थकान महसूस कर सकती हैं। इसलिए सेल्फ-केयर रूटीन बनाएं। हेल्दी खाना खाएं, नींद पूरी करें, दोस्तों से बात करें। अगर जरूरत लगे तो काउंसलर से कंसल्ट करें।

हर अनुभव कुछ सिखाता है
जीवन में हर अनुभव कुछ-न-कुछ सिखाता है। आपको इस अलगाव से यह सीख मिलेगी कि तमाम जिम्मेदारियों के बीच खुद को कभी नहीं भूलना चाहिए। खुद को खोजकर ये सीख मिलेगी कि रिश्ते में स्पेस मांगना गलत नहीं, जरूरी है। आप गलत नहीं हैं। आप खुद को पहचानने की कोशिश कर रही हैं। यह अपने आप में ही बेहद खूबसूरत बात है।
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आपके सवाल पूछने के तरीके से लगता है कि आप एक समझदार इंसान हैं, जो रिश्ता बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन खुद को भी दर्द नहीं देना चाहतीं। ये अच्छी बात है। चलिए, धीरे-धीरे समझते हैं कि आपके रिश्ते में क्या हो रहा है और ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए। आगे पढ़िए…
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