Recipe: लू से बचाव और स्वाद का तड़का, मेहमानों के लिए राबड़ी जरूर ट्राई करें

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SUMMER DRINK: राजस्थानी राबड़ी आटे और छाछ से बनाई जाने वाली पारंपरिक ठंडा पेय है. यह गर्मियों में शरीर को ठंडक, ऊर्जा और हाइड्रेशन देती है, साथ ही पाचन सुधारने और त्वचा निखारने में भी मददगार है. जानिए आसान रेसिपी…

राजस्थान में बनने वाला पारंपरिक व्यंजन राबड़ी एक पौष्टिक और ठंडा पेय पदार्थ है. यह राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा माना जाता है. आटे और छाछ से बनने वाली राबड़ी विशेष रूप से गर्मियों में पसंद की जाती है. इस समय राजस्थान में पड़ रही भयंकर गर्मी से राहत पाने के लिए लोग राबड़ी का सेवन कर रहे हैं.

आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार के अनुसार, यह पेय शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन से भी बचाता है. स्पेशल रेसिपी सीरीज में आज हम आपको राजस्थानी बाजरे और गेहूं के आटे की राबड़ी बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे.

गृहणी रीना देवी के अनुसार, राजस्थानी राबड़ी गेहूं और बाजरे के आटे और छाछ से बनाई जाती है. इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है. इसे बनाने के लिए गेहूं या बाजरे का आटा, छाछ, पानी, नमक, जीरा पाउडर और हींग की आवश्यकता होती है. तैयारी के लिए एक बर्तन में आटा लें और उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गांठ रहित, पतला घोल तैयार करें.

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अब इस घोल में छाछ डालें और अच्छे से फेंटें, ताकि मिश्रण एकदम स्मूथ हो जाए. इसके बाद एक मोटे तले की कड़ाही में यह मिश्रण डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं. लगभग 10-12 मिनट तक पकाएं जब तक राबड़ी गाढ़ी होकर हलवा जैसी न हो जाए. इस दौरान उसमें हींग और जीरा डालें. अंत में स्वादानुसार नमक मिलाएं. राबड़ी को ठंडी या गर्म दोनों तरह से पिया जा सकता है. गर्मियों में ठंडी राबड़ी शरीर को ठंडक देती है और भूख को शांत करती है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार के अनुसार, आटे और छाछ से बनने वाली यह डिश सेहत के लिए लाभकारी होती है. यह शरीर को ठंडक प्रदान करती है और गर्मियों में लू से बचाव करती है. राबड़ी में मौजूद छाछ पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देती है.

इसमें आटे की वजह से फाइबर भी होता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है. राबड़ी पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम होती है. इसके अलावा यह शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होती है, जिससे त्वचा भी निखरी रहती है. नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

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