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Kandali Sabji Recipe: उत्तराखंड के पहाड़ों में पाई जाने वाली ‘कंडाली’ (बिच्छू घास) को छूने भर से शरीर में झनझनाहट होने लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी घास से बनी सब्जी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ऋषिकेश और आसपास के पहाड़ी इलाकों में इसे बड़े चाव से खाया जाता है. आयरन और कैल्शियम से भरपूर यह सब्जी खून की कमी दूर करने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द में भी रामबाण इलाज मानी जाती है. जानिए कैसे बनती है यह ‘कांटेदार’ सब्जी और क्या हैं इसके जबरदस्त फायदे.
Kandali Sabji Recipe: पहाड़ों की पारंपरिक थाली में शामिल कंडाली की सब्जी आज भी अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण खास पहचान रखती है. उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली कंडाली को स्थानीय भाषा में ‘बिच्छू घास’ भी कहा जाता है. इस पौधे की खासियत यह है कि अगर यह गलती से भी त्वचा को छू जाए, तो तेज जलन और चुभन महसूस होती है. लेकिन सही तरीके से पकाने के बाद यही घास एक पोषण से भरपूर और स्वादिष्ट सब्जी में बदल जाती है.
कंडाली की सब्जी बनाने का तरीका
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान गृहिणी रुचि ने बताया कि कंडाली की सब्जी बनाने की प्रक्रिया भी काफी खास होती है. सबसे पहले कंडाली के कोमल पत्तों को सावधानी से तोड़ा जाता है ताकि हाथों में जलन न हो. इसके बाद पत्तों को अच्छी तरह धोकर उबाला जाता है, जिससे इसके कांटे और जलन पैदा करने वाले तत्व खत्म हो जाते हैं. उबालने के बाद कंडाली को बारीक काट लिया जाता है. फिर कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करके उसमें लहसुन, हरी मिर्च और जीरा डाला जाता है. मसाले भूनने के बाद इसमें कंडाली डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है.
कई जगह इसमें मक्का या गेहूं का आटा मिलाकर इसे थोड़ा गाढ़ा भी बनाया जाता है. देसी मसालों और सरसों के तेल की खुशबू इस सब्जी को खास स्वाद देती है. पहाड़ी लोग इसे मंडुवे की रोटी या चावल के साथ खाना पसंद करते हैं, जिससे इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ जाती है.
सेहत के लिए फायदेमंद कंडाली की सब्जी
कंडाली को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे खून की कमी दूर करने और शरीर की कमजोरी को खत्म करने के लिए खास तौर पर खाया जाता है. यह सब्जी पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मदद करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है.
पारंपरिक आयुर्वेद में भी कंडाली को कई औषधीय गुणों वाला पौधा बताया गया है. स्थानीय लोगों का मानना है कि नियमित रूप से इसका सेवन करने से जोड़ों के दर्द और थकान में राहत मिलती है. यही वजह है कि पुराने समय से इसे प्राकृतिक दवा और पोषक आहार दोनों के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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