13 की उम्र में घर से भागा, पेरिस पहुंचा, पढ़ाई-लिखाई जीरो, फिर भी बना दिया बिलियन डॉलर का बिजनेस

Louis Vuitton Success Story: 13 साल का बच्चा, जेब में खाली, हाथ में बस हौसला और पैदल 292 मील की यात्रा…लुई विटॉन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं. पढ़ना-लिखना नहीं आता था, परिवार में मुश्किलें थीं, फिर भी उसने दुनिया के सबसे बड़े लग्जरी ब्रांडों में से एक खड़ा कर दिया. यह वही लुई विटॉन है, जिसका नाम आज हर किसी के जुबान पर है. यह कहानी है उस बच्चे की, जिसने आम समस्याओं में छिपे अवसर को देखा और इतिहास रच दिया.

लुई विटॉन का जन्म साल 1821 में फ्रांस के एक छोटे से गांव आंचे (Anchay) में हुआ. जब वह 10 साल का था, तब उसकी मां का निधन हो गया. पिता ने दूसरी शादी कर ली, लेकिन सौतेली मां का व्यवहार बेहद खराब था. इसी वजह से 13 साल की उम्र में लुई ने घर छोड़ने का फैसला किया.

जंगल में सोया, भूखा रहा, फिर भी बनाया महंगा लग्जरी ब्रांड
घर से भागने के बाद लुई पैदल ही पेरिस के लिए निकल पड़ा. यह सफर आसान नहीं था. उसे करीब 292 मील (लगभग 470 किलोमीटर) पैदल चलना पड़ा और इस सफर में पूरे 3 साल लग गए. रास्ते में वह जंगलों में सोया, छोटे-मोटे काम किए और किसी तरह खाने का इंतजाम किया. साल 1837 में 16 साल की उम्र में वह पेरिस पहुंचा. उस वक्त उसके पास न पैसा था, न पहचान और न ही पढ़ाई-लिखाई का ज्ञान.

देख लिया सूटकेस की एक कमी
लेकिन उसी दौर में दुनिया तेजी से बदल रही थी. रेलगाड़ियां और स्टीमशिप लोकप्रिय हो रही थीं. यात्राएं अब घोड़ा-गाड़ी से हटकर सपाट सतह वाले ट्रांसपोर्ट पर होने लगी थीं. उस समय इस्तेमाल होने वाले गोल ढक्कन वाले ट्रंक ठीक से एक के ऊपर एक नहीं रखे जा सकते थे. वे ज्यादा जगह घेरते थे और सफर में गिर भी जाते थे. लुई विटॉन ने इसी समस्या को पहचाना. उसने चपटे ट्रंक बनाए, जिन्हें आसानी से स्टैक किया जा सकता था. यह छोटा सा आइडिया अमीर यात्रियों को बहुत पसंद आया. धीरे-धीरे यूरोप के राजघरानों से ऑर्डर आने लगे. उसका काम बढ़ा, वर्कशॉप फैली और नए कारीगर जुड़े.

बना दिया 129 अरब डॉलर का ब्रांड
साल 1896 में लुई विटॉन के बेटे जॉर्जेस ने नकली सामान से बचने के लिए मशहूर LV मोनोग्राम डिजाइन किया, जो आज भी ब्रांड की पहचान है. आज लुई विटॉन करीब 129 अरब डॉलर की वैल्यू के साथ दुनिया का सबसे कीमती लग्जरी ब्रांड माना जाता है. यह पूरी कहानी इस बात का सबूत है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इंसान समस्या को पहचान ले और अलग सोच सके, तो एक साधारण बच्चा भी अरबों डॉलर का साम्राज्य खड़ा कर सकता है.

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