आज रामनवमी है। अयोध्या में दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा। इसी समय अभिजीत मुहूर्त रहेगा। वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए रामनवमी पर दोपहर का समय बेहद खास माना जाता है। घर में पूजा के लिए आज सुबह 11:15 से दोपहर 1:35 तक शुभ मुहूर्त रहेगा। रामनवमी पर व्रत, पूजन और आरती की परंपरा है। दैनिक भास्कर ने रामलला के पुजारी पं. संतोष तिवारी से घर में की जाने वाली आसान पूजा विधि जानी। उनके बताए अनुसार आप सरल तरीके से श्रीराम की पूजा, आरती कर के जन्मोत्सव मना सकते हैं। पूजा के लिए जरूरी चीजें
जल, पंचामृत, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, धूप–दीप, मौसमी फल, मिठाई। अयोध्या में 11:55 पर आरती और सूर्य तिलक इसके बाद 56 भोग सुबह 4 बजे उत्थान के साथ मंगला आरती: इसमें भगवान को जगाकर तुलसी की डंडी से दातून करवाकर मधुपर्क का भोग लगेगा। धूप-दीप नैवेद्य के साथ आरती होगी। सुबह 6:30 पर श्रृंगार आरती: भगवान को सरयू जल से स्नान के बाद श्रृंगार होगा। धूप-दीप के साथ मिठाई और फलों का भोग लगेगा। इसके बाद दर्शन शुरू हो जाएंगे। सुबह 10:30 पर विशेष पूजा और श्रृंगार: साढ़े 10 बजे कुछ देर के लिए पट बंद होंगे। इस दौरान नारियल पानी, पंचामृत, औषधियों से भगवान का अभिषेक होगा। भगवान को पितांबर पहनाकर श्रंगार होगा। सुबह 11:55 पर आरती और सूर्य तिलक: सुबह 11:55 पर आरती शुरू होगी और आरती के चलते ही ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा। इसके बाद 56 भोग का नैवेद्य लगेगा। मंदिर में बधाइयां गायी जाएंगी। शाम 7 बजे संध्या आरती: इस आरती में फल, पेड़े और मधुपर्क का भोग लगता है। रात 10 बजे शयन आरती: इस आरती में खीर-पूरी और सब्जी का भोग लगाकर भगवान को शयन करवाया जाता है। वाल्मीकि रामायण: पुत्रकामेष्टि यज्ञ से हुआ राम का जन्म
वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, दशरथ जब बहुत बूढ़े हुए तो संतान न होने के कारण चिंतित रहने लगे। ऋषियों ने उन्हें पुत्रकामेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी। महर्षि वसिष्ठ के कहने पर दशरथ ने ऋषि श्रृंग को इस यज्ञ के लिए बुलाया। कथा के मुताबिक यज्ञ पूरा होने के बाद अग्नि देव प्रकट हुए। उन्होंने खीर से भरा सोने का घड़ा दशरथ को दिया और रानियों को खीर खिलाने को कहा। दशरथ ने ऐसा ही किया। एक साल बाद चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया। कैकेई ने भरत और सुमित्रा से जुड़वां बच्चे लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। .