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Chhatarpur News: रामकिशोर ने लोकल 18 से कहा, ‘मैंने अपने घर की छत पर कुंदरू से लेकर लौकी तक लगा रखी है. घर के आंगन में एक आंवला पेड़ भी लगाया है, जिसपर कुंदरू की बेल चढ़ चुकी है.’
छतरपुर. अगर आप भी बाजार से महंगी सब्जियां खरीदकर परेशान हो गए हैं, तो आप मध्य प्रदेश के छतरपुर के रामकिशोर की तरह घर को गार्डन में तब्दील कर सकते हैं. रामकिशोर ने अपने घर को ही गार्डन बना दिया है. यहां आंवला पेड़ से लेकर तमाम तरह की सब्जियां उगाई गई हैं, जिससे इन्हें सब्जियां तो शुद्ध मिलती ही हैं, साथ ही बाजार से महंगी सब्जी खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ती है. रामकिशोर ने लोकल 18 से कहा, ‘मैं हर साल ही अपने घर में सब्जियां लगाता हूं ताकि मुझे बाजार न जाना पड़े क्योंकि बाजार में सब्जियां भी महंगी होती हैं और शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं होती है, इसलिए मैंने अपने घर में सब्जियां लगाने से लेकर हर तरह के पेड़-पौधे भी लगा रखे हैं.’
उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरे घर में स्पेस रहता है, वहां मैं सब्जियां लगाता हूं. यहां तक कि मैं अपनी छत में भी सब्जियां उगा देता हूं. आपने भी देखा होगा कि मैंने छत में कुंदरू से लेकर लौकी तक लगा रखी है. मेरे घर के आंगन में एक आंवला का पेड़ भी लगा रखा है, जिसपर कुंदरू की बेल चढ़ गई है. इसके साथ ही मैंने अपने घर के ही बगल से सटे घर में टमाटर भी लगा रखा है. करेला भी लगाया था, हालांकि अभी वह सूख गया है. मेरा मानना है कि बाजारों की सब्जियों पर हमें निर्भर नहीं होना चाहिए. अगर हमारे घर में पर्याप्त जगह है, तो हमें घर पर ही सब्जियों को उगा देना चाहिए ताकि हमारा पैसा भी बचे और हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहे.’
मुफ्त में बांटा कुंदरू
उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने अपने घर में लौकी लगाई थी और यह लौकी भी क्विंटलों फल दे रही है. साथ ही जो मैंने कुंदरू लगा रखा है, वह भी अभी तक कई कुंतलों फल दे चुका है. कुंदरू की जो सब्जी होती है, वह बारिश के मौसम में आती है लेकिन मेरा यह कुंदरू बारिश से लेकर अभी ठंड में भी फल दे रहा है. मैंने खुद तो खाया ही, साथ ही लोगों को भी फ्री में कुंतलों कुंदरू बांट दिया है क्योंकि मैं इसे अकेले नहीं खा सकता हूं. मैंने तो इसे शौक के तौर पर लगाना शुरू किया था. मुझे नहीं मालूम था कि ये सब्जियां इतनी ज्यादा फलेंगी.’
रामकिशोर ने कहा, ‘ये जो मैं सब्जियां लगाता हूं, ये बिना खाद के तैयार होती हैं. इसमें सिर्फ पानी ही देना होता है और जैसे साधारण तरीके से कोई लगाता है, वैसे ही मैं भी लगा देता हूं और इसमें अलग से कुछ भी नहीं करता हूं.’
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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