Ram Bhadracharya: ध्वजारोहण में बुलावा नहीं मिलने पर जताया दुख, बोले अब काशी–मथुरा की है पुकार

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Ram Bhadracharya: राम मंदिर का वैभव और सौंदर्य केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है. अयोध्या में 25 नवंबर को होने जा रहें कार्यक्रम को लेकर देश भर में उत्साह और भावनाओं की लहर है.

एबीपी न्यूज से बातचीत में धर्माचार्य राम भद्राचार्य ने इस ऐतिहासिक पल को लेकर अपनी खुशी साझा की.

आज रमणीय स्वरूप में होंगे विराजमान 

उन्होंने कहा कि आज जो कुछ भी हो रहा है, वे उन भावनाओं और त्यागों की जीत है, जो राम उपासकों ने 1984 से लेकर आज तक दिए हैं. उन्होंने बताया कि इस आंदोलन के दौरान वे स्वयं जेल गए, पुलिस की लाठियां झेली और अदालतों में गवाही दी.

उन्होंने कहा- आज भगवान राम अपने रमणीय स्वरूप में विराजमान हो रहे हैं, यह देखकर मैं अत्यंत प्रसन्न हूं. वहीं 25 तारीख को जब देश के प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करेंगे, वह क्षण हम सब के लिए गर्व से भरा पल होगा.

राम भक्तों को नहीं मिल रहा उचित सम्मान

राम भद्राचार्य ने आगे बताया कि सनातन धर्म केवल पूजा या मान्यता नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण जीवन की पद्धति है. जिसे सनातन धर्म के लोगों को अपनाने के लिए वैदिक भारतीय परंपरा को समझना होगा और राम लला की सेवा करनी होगी. 

उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों को अभी भी उचित सम्मान नहीं मिल रहा है, जबकि इस आंदोलन में हजारों लोगों ने अपना जीवन और संघर्ष लगाया है.

राम भद्राचार्य ने बताया कि हमें कुछ नहीं चाहिए, पर 25 तारीख को हो रहे कार्यक्रम में हमें बुलाना चाहिए था, मगर हमें आमंत्रण तक नहीं मिला, मुझे इस बात का दुख नहीं हैं, लेकिन मैं रूष्ट जरूर हूं.

चित्रकूट से जुड़ाव और दिव्यांगों के लिए सेवा

जब उनसे पूछा गया कि अयोध्या में रहने के बजाय वे चित्रकूट में क्यों रहते हैं, तो उन्होंने बताया कि भगवान राम का हृदय चित्रकूट में रमा था और उन्हें भी वहीं शांति मिलती है.

राम भद्राचार्य ने 2001 से अब तक दस हजार से अधिक दिव्यांगों को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद की है. वहीं उन्हें इस वर्ष संस्कृत जगत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ज्ञानपीठ से सम्मानित भी किया गाया है.

अब काशी और मथुरा का है संकल्प

राम मंदिर के पूर्ण होने के बाद उन्होंने कहा कि अब नई आध्यात्मिक यात्रा शुरू होगी. क्योंकि अयोध्या का हमारा संकल्प पूरा हो चुका है, जिसके बाद अब काशी और मथुरा हमारा अगला संकल्प हैं. हमें ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि वापस चाहिए. उन्होंने बताया कि जब तक कृष्ण जन्मभूमि हमें वापस नहीं मिल जाती, तब तक मैं बांके बिहारी के दर्शन नहीं करूंगा.

सीतामढ़ी में माता सीता का मंदिर

वहीं सितामढ़ी के पुनौरा धाम में माता सीता के प्रकट होने का प्रमाण भी धर्माचार्य राम भद्राचार्य ने ही इतिहास और शास्त्रों के आधार पर प्रस्तुत किया था.

जिसके बाद सरकार ने इसे मान्यता दी और भारत के गृह मंत्री द्वारा वहां मंदिर के लिए भूमि पूजन किया गया. 

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