भोपाल. मध्य प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मियां इन दिनों चरम पर हैं, जहां कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का भोपाल दौरा और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का अचानक इस्तीफा सुर्खियां बटोर रहा है. 24 फरवरी 2026 को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भोपाल पहुंच रहे हैं, जहां वे किसान महापंचायत में हिस्सा लेंगे और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेंगे. यह महापंचायत मध्य प्रदेश से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर पर किसान आंदोलन की नई लहर पैदा करने का मंच बनेगी, जहां कांग्रेस ट्रेड डील को किसान विरोधी करार दे रही है. दूसरी तरफ, हेमंत कटारे के इस्तीफे ने कांग्रेस के आंतरिक कलह की अफवाहों को हवा दी है, जिसे भाजपा कांग्रेस की कमजोरी के रूप में भुना रही है. किसानों की दुर्दशा-नकली खाद-बीज से लेकर बेमौसम बारिश और ओलों के कहर- इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि बना रही है, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है.
यह सब कुछ महज संयोग नहीं लगता. राहुल गांधी का भोपाल दौरा कांग्रेस के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो किसान मुद्दों को केंद्र में लाकर सरकार पर हमला बोलने का मौका देगा. ट्रेड डील, कांग्रेस इसे ‘किसान विरोधी’ बताकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में अभियान चला रही है, जहां किसान वोट बैंक निर्णायक है. भोपाल की महापंचायत से यह आंदोलन शुरू होगा, जहां राहुल किसानों से सीधे संवाद करेंगे और ट्रेड डील के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे. यह दौरा कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूती देने का प्रयास है.
पद से इस्तीफा है, पार्टी से नहीं; सवाल है क्या कांग्रेस में लीडरशिप क्राइसिस है?
हेमंत कटारे के इस्तीफा ने इस घटनाक्रम को और रोचक बना दिया है. 20 फरवरी को उन्होंने उपनेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, कारण बताते हुए कहा कि परिवार और निर्वाचन क्षेत्र (अटेर, भिंड) को समय नहीं दे पा रहे. कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह पद से इस्तीफा है, पार्टी से नहीं, और कटारे कांग्रेस में बने रहेंगे. लेकिन भाजपा इसे कांग्रेस के आंतरिक घमासान का प्रमाण बता रही है. भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी स्थिति पर चिंतन-मंथन करना चाहिए, क्योंकि पार्टी में असंतोष साफ दिख रहा है. वहीं, कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कटारे का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला. विधानसभा में शेर की तरह लड़ने वाले हेमंत को मजबूरी में इस्तीफा देना पड़ा. यह इस्तीफा राहुल के दौरे से ठीक पहले हुआ, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस में लीडरशिप क्राइसिस है? कटारे, जो भाजपा पर तीखे हमले करते रहे हैं, अब सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रखने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह घटना कांग्रेस की एकता पर सवाल खड़े करती है.
किसान महापंचायत से ट्रेड डील को जोड़कर राष्ट्रीय एजेंडा बनाने की तैयारी!
किसानों की हालत इस पूरे परिदृश्य की जड़ है. मध्य प्रदेश में किसान नकली खाद और बीज से त्रस्त हैं, जो फसलें बर्बाद कर रही हैं. हाल ही में बेमौसम बारिश और ओलों ने सोयाबीन, गेहूं और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया. सरकार ने सर्वे कराने और मुआवजा देने का वादा किया है, लेकिन किसान सशंकित हैं कि अमल कितना होगा. फेक हर्बिसाइड्स और पेस्टीसाइड्स की समस्या पुरानी है, जो हजारों किसानों को प्रभावित कर रही है. कांग्रेस इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला बोल रही है, जबकि भाजपा इसे सामान्य मौसमी समस्या बता रही है. राहुल का दौरा इसी असंतोष को भुनाने का प्रयास है-किसान महापंचायत से ट्रेड डील को जोड़कर कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर किसान एजेंडा सेट करना चाहती है.
आंतरिक असंतोष- कांग्रेस की कमजोरी
राजनीतिक विश्लेषण से देखें तो यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए दोधारी तलवार है. एक तरफ, राहुल का दौरा पार्टी को ऊर्जा दे सकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां किसान वोटर भाजपा से नाराज हैं. ट्रेड डील विरोध से कांग्रेस वैश्विक मुद्दों को स्थानीय स्तर पर जोड़कर विदेश नीति पर सवाल उठा रही है, जो 2029 लोकसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है. लेकिन कटारे का इस्तीफा कांग्रेस की कमजोरी उजागर करता है-यह आंतरिक असंतोष का संकेत है, जो भाजपा को मौका देता है कि वह कांग्रेस को ‘विभाजित’ बताकर हमला बोले. रामेश्वर शर्मा की सलाह इसी रणनीति का हिस्सा है, जो कांग्रेस को डिफेंसिव मोड में धकेलती है. पीसी शर्मा का बयान भी इशारा करता है कि कांग्रेस में सम्मान और पदों पर असंतोष है, जो आगे और इस्तीफों को जन्म दे सकता है.
पार्टी की एकता पर सवाल! क्या भाजपा को मौका दे रही है कांग्रेस
किसान मुद्दे पर बात करें तो मध्य प्रदेश किसानों का गढ़ है, जहां नकली इनपुट्स और मौसमी आपदाएं सालाना करोड़ों का नुकसान कराती हैं. सरकार का मुआवजा वादा अच्छा है, लेकिन क्रियान्वयन की कमी से किसान आंदोलित हैं. राहुल का दौरा इस आग में घी डाल सकता है, अगर कांग्रेस इसे सड़क पर उतार सके. लेकिन अगर आंतरिक कलह बढ़ी, तो फायदा भाजपा को मिलेगा, जो विकास और स्थिरता का दावा करती है. कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश की राजनीति को नई मोड़ दे रहा है. राहुल का दौरा कांग्रेस को मजबूत कर सकता है, लेकिन कटारे जैसे मामलों से पार्टी की एकता पर सवाल हैं. किसान असंतोष अगर संगठित हुआ, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव ला सकता है. देखना होगा कि क्या कांग्रेस इस मौके को भुना पाती है, या भाजपा इसे अपने पक्ष में मोड़ लेती है.
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