एक छोटे से कमरे से 2 लाख करोड़ की दौलत तक: राधाकिशन दमानी की सफलता की कहानी

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राधाकिशन दमानी की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और दूरदर्शिता का बेहतरीन उदाहरण है. मुंबई के एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ उनका सफर आज 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के साम्राज्य तक पहुंच चुका है. शेयर बाजार की गहरी समझ और DMart जैसे मजबूत ब्रांड ने उन्हें भारत के दिग्गज निवेशकों की कतार में खड़ा कर दिया.

स्टॉक मार्केट से रिटेल साम्राज्य तक, राधाकिशन दमानी ने बदली निवेश की परिभाषा.(Image:News18)

मुंबई. राधाकिशन दमानी का नाम आज भारत के सबसे सम्मानित निवेशकों और उद्यमियों में लिया जाता है. जिस शख्स ने कभी मुंबई के एक छोटे से कमरे में संघर्ष भरा जीवन देखा, वही आज करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश पोर्टफोलियो का मालिक है. दमानी की सफलता किसी तेज मुनाफे की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और दूरदर्शी सोच का नतीजा है. उन्होंने न सिर्फ शेयर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि DMart जैसे भरोसेमंद रिटेल ब्रांड की नींव रखकर आम भारतीय की रोजमर्रा की खरीदारी को भी बदल दिया.

साधारण शुरुआत, मजबूत नींव
12 जुलाई 1954 को राजस्थान के बीकानेर में जन्मे राधाकिशन दमानी एक मारवाड़ी परिवार से आते हैं. उनका बचपन मुंबई में बीता, जहां परिवार एक छोटे से कमरे में रहता था. उनके पिता शेयर ब्रोकर थे, जिससे दमानी को बाजार की शुरुआती समझ घर से ही मिली. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों और पिता के निधन के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी. इसके बाद उन्होंने परिवार के ब्रोकरेज बिजनेस को संभाला और यहीं से शेयर बाजार की गहराई को समझने का सिलसिला शुरू हुआ.

शेयर बाजार में दूरदर्शी निवेशक के रूप में पहचान
1980 के दशक में दमानी ने ब्रोकरेज से आगे बढ़कर खुद निवेश करना शुरू किया. शुरुआत में वे ट्रेडिंग करते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने लंबी अवधि के निवेश की ताकत को पहचाना. बाजार के उतार-चढ़ाव से सीखते हुए उन्होंने धैर्य और अनुशासन को अपनी रणनीति बनाया. हर्षद मेहता घोटाले के दौर में, जब कई निवेशक नुकसान में थे, दमानी ने शॉर्ट सेलिंग के जरिए सही समय पर फैसले लिए. इससे उनकी पहचान एक शांत, लेकिन बेहद सटीक रणनीति अपनाने वाले निवेशक के रूप में बनी.

DMart: सादगी से बना रिटेल साम्राज्य
साल 2002 में राधाकिशन दमानी ने मुंबई में DMart की शुरुआत की. उनका फोकस था- रोजमर्रा की जरूरत की चीजें, कम कीमत और भरोसेमंद गुणवत्ता. बिना ज्यादा दिखावे और आक्रामक विज्ञापन के, DMart ने ग्राहकों का भरोसा जीता. धीरे-धीरे देशभर में इसके स्टोर्स खुलते गए. 2017 में कंपनी का आईपीओ आया, जिसने दमानी को रिटेल और निवेश- दोनों दुनिया का बड़ा नाम बना दिया. आज उनकी सादगी, सफेद कपड़ों की पहचान और मजबूत बिजनेस सोच उन्हें ‘मिस्टर व्हाइट एंड व्हाइट’ के नाम से मशहूर बनाती है. दमानी की कहानी यह सिखाती है कि संयम और लंबी सोच से असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

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