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Rabies Prevention Tips: रेबीज एक जानलेवा वायरस है और कुत्ते के काटने के बाद लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए. डॉग बाइट के बाद घाव को साबुन से धोना प्रिकॉशनरी अप्रोच है, लेकिन इससे वायरस नहीं मरता ह…और पढ़ें
कुत्ता काटने के बाद सिर्फ एंटी रेबीज वैक्सीन ही इस जानलेवा बीमारी से बचा सकती है.नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर और सीनियर वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुनीत के सिंह ने News18 को बताया कि जब कुत्ता किसी व्यक्ति को काट लेता है, तो ब्लड निकलता है और कुत्ते की लार में मौजूद रेबीज का वायरस ब्लड के जरिए शरीर में पहुंच जाता है. नर्व्स के माध्यम से यह वायरस ब्रेन में पहुंच जाता है. कई बार यह वायरस 10 साल तक ब्रेन में पड़ा रहता है और शरीर की इम्यूनिटी कंप्रोमाइज होने पर 11वें साल में अचानक एक्टिव हो जाता है. इससे लोगों की मौत हो जाती है. अगर कुत्ता न्यूरोमस्कुलर जंक्शन पर काट ले, तब भी यह वायरस ब्रेन में ट्रांसमिट हो जाता है. शरीर की जिस जगह पर नर्व मसल्स से बाइंड करती हैं, उसे न्यूरोमस्कुलर जंक्शन कहा जाता है. इससे भी रेबीज ब्रेन में पहुंचता है.
वायरोलॉजिस्ट की मानें तो डॉग बाइट को लेकर लोगों को बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. कुत्ते की लार में रेबीज का वायरस होता है और कुत्ते के काटने से यह वायरस डायरेक्ट शरीर में पहुंचता है. इस कंडीशन में सिर्फ एंटी रेबीज वैक्सीन काम आती है. लोगों को सोशल मीडिया पर प्रचलित अफवाहों से बचना चाहिए और रेबीज को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. इसे लेकर लापरवाही करना लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है. कुत्ता काटने के बाद लोग फर्स्ट एड के तुरंत बाद डॉक्टर से मिलें और एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं. इस वैक्सीन की कई डोज होती हैं, जिन्हें सही अंतराल पर जरूर लेना चाहिए.
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें