Last Updated:
Ranchi Adivasi Winter Tent: रांची के खूंटी एरिया में कड़ाके की ठंड में लोग घांस और पुआल से देसी टेंट बनाकर रहते हैं, जिससे 4 डिग्री तापमान में भी बिना रजाई के जैसे गर्मी मिलती है. यह परंपरा आदिवासियों के दादा-परदादा के समय से चली आ रही है.
रांची : ठंड से बचने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं. ब्रांडेड स्वेटर से लेकर अच्छे-अच्छे कंपनी का रूम हीटर जलाते हैं, लेकिन रांची से सटे खूंटी एरिया में जहां पर सबसे कम न्यूनतम तापमान रहता है,. यहां का तापमान करीबन 3 से 4 डिग्री तक पहुंच जाता है. यहां गांव के लोग इतना एफोड नहीं कर सकते हैं. ऐसे में वह घांस से ही एक शानदार टेंट तैयार करते हैं, जिसमें ऐसी गर्मी लगती है कि पसीने छूट जाएंगे.
यह टेंट दिखने में इतना खूबसूरत लगता है. साथ ही अंदर में वह रात यहीं गुजारते हैं. साथ ही नीचे भी पुआल का ही गद्दा बना लेते हैं. यह नेचुरल हॉट गद्दा का काम करता है. स्थानीय निवासी कपिल बताते हैं कि यह खूंटी साइड का एरिया है. यहां पर ठंडा सबसे अधिक पड़ता है. अगर जिले में दूसरी जगह कहीं 10 डिग्री न्यूनतम तापमान है, तो यहां पर 4 डिग्री होगा. क्योंकि यह पूरा घने जंगलों के बीच में है.
जानें क्यों पडती है टेंट बनाने की जरूरत
उन्होंने बताया कि यहां पर पूरे झारखंड में सबसे कम न्यूनतम तापमान हमेशा दर्ज किया जाता है. अभी बोले तो 4 डिग्री तापमान है. अब ऐसे में कई सारे ऐसे निम्न वर्ग के परिवार हैं, गांव वाले हैं. जब 2-3 मोटा रजाई लेना बड़ा मुश्किल हो जाता है, तो विकल्प के तौर पर इस तरह के टेंट बना लेते हैं, लेकिन यकीन मानिए इसके बाद तो रजाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है. बस एक पतला सा चादर और काम हो गया.
पसीने छूट जाएंगे आपके
कपिल बताते हैं कि यह हमारे लिए हॉट रूम का काम करता है. अब बस एक बार सो कर देखिए, पसीना ना छूटेगा तो कहियेगा. नीचे पूवाल रहता है, किसी के पास चादर है, तो ठीक है वरना बिना चादर के भी लोग सो लेते हैं. नीचे पूवाल का गद्दा होता है. ऐसी गर्माहट देता है कि आपको नीचे बिछाने के लिए भी चादर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.
आगे बताते हैं कि ये हमारा देसी तरीका है, जो हमारे दादा परदादा इसे इस्तेमाल करते आ रहे हैं. इसीलिए जब भी कर्कश ठंड का मौसम जैसे दिसंबर का मौसम आता है, तो हम इस तरह का एक छोटा-छोटा टेंट बना लेते हैं और एक महीने रात में यहीं सोते हैं. इसे बनाना भी आसान है. बस आपको इसके लिए 15- 20 बांस चाहिए होता है और पुआल चाहिए, ये आसानी से उपलब्ध हो जाता है और एक दूसरे से बांधते हुए महज 2 से 3 घंटे में तैयार हो जाता है.
About the Author
बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें
.