Last Updated:
बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में आज भी कई प्रकार के पहाड़ी नुस्खे आजमाने जाते हैं. इनसे न सिर्फ दर्द ठीक होता है, बल्कि यह पहाड़ में आसानी से उपलब्ध भी हो जाते हैं, और आपको पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है.
बागेश्वर: बिच्छू घास को छूते ही जलन और झनझनाहट महसूस होती है, इसी कारण पहाड़ के बच्चे इससे डरते हैं, लेकिन यही घास पहाड़ों में दर्द ठीक करने की औषधि मानी जाती है. इसमें प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा के संपर्क में आने पर नसों को सक्रिय करते हैं. इससे ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है और दर्द वाले हिस्से में जमी जकड़न धीरे-धीरे कम होने लगती है. यही कारण है कि पहाड़ के बुजुर्ग इसे खूब यूज करते हैं.
पहाड़ के स्थानीय जानकार गोपाल बोरा बताते हैं कि डेली रूटीन में भारी काम, खेतों में मेहनत या लंबे समय तक बैठने से कमर दर्द होने आम परेशानी है. बिच्छू घास की हल्की टहनी से कमर के दर्द वाले हिस्से पर पांच बार स्पर्श करने से वहां झनझनाहट होती है. यह झनझनाहट नसों को सक्रिय कर देती है, जिससे दर्द के संकेत कमजोर पड़ने लगते हैं. पहाड़ों में इसे बिना किसी दवा के तुरंत राहत देने वाला उपाय माना जाता है. आज भी पहाड़ में इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है.
उम्र बढ़ने के साथ घुटनों और जोड़ों में दर्द होना आम बात है. बिच्छू घास का प्रयोग घुटनों, कोहनियों और कंधों पर भी किया जाता है. इसके स्पर्श से जोड़ों के आसपास जमा तनाव कम होता है. नियमित रूप से सप्ताह में दो से तीन बार इसका प्रयोग करने से लंबे समय के दर्द में भी काफी राहत मिलती है. इसलिए आप भी पहाड़ में रहते हैं, तो दर्द से राहत पाने के लिए इसका यूज कर सकते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
बिच्छू घास की एक मीडियम कली लें. उसके आधे पत्ते काट दें और ऊपर से पकड़ने के लिए डंडी छोड़ दें. अब जिस स्थान पर दर्द है, वहां हल्के हाथ से पांच बार लगाएं. जोर से रगड़ना नहीं है. ऐसा करने से हल्की जलन या झनझनाहट महसूस होगी, जो कुछ मिनट में सामान्य हो जाती है. आप चाहे तो जलन को शांत करने के लिए सरसों का तेल लगा सकते हैं.
कई बार बिच्छू घास लगाने के बाद खुजली या तेज जलन हो सकती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. उस स्थान पर सरसों का तेल लगा दिया जाए तो जलन और खुजली दोनों शांत हो जाती हैं. कुछ लोग गाय के घी का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे त्वचा को ठंडक मिलती है. एक बात का खास ध्यान रखें कि इस स्थान को पानी से एक घंटे तक बिल्कुल भी ना धोएं ऐसा करने से जलन और बढ़ सकती है.
यह नुस्खा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है, जो खेतों में काम करते हैं, भारी वजन उठाते हैं या उम्र बढ़ने के कारण जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं. पहाड़ों में महिलाएं भी इसे घरेलू काम से होने वाले हाथों और कंधों के दर्द में इस्तेमाल करती हैं. इसलिए पहाड़ की महिलाएं दर्द से राहत पाने के लिए बिच्छू घास का खूब इस्तेमाल करती है.
हालांकि यह एक पारंपरिक नुस्खा है, लेकिन इसे खुले घाव, कटे हुए स्थान या बहुत संवेदनशील त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए. एलर्जी की समस्या वाले लोग पहले हल्के से परीक्षण कर लें, तब इस्तेमाल करें. गंभीर या लंबे समय से चले आ रहे दर्द में डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है. फिर भी पहाड़ों में यह नुस्खा आज भी भरोसे के साथ अपनाया जाता है. दर्द से राहत पाने के लिए हर पहाड़ी की जुबान पर आपको यह नुस्खा सुनने को मिल जाएगा.
बिच्छू घास का प्रयोग रोजाना करने की जरूरत नहीं होती है. दर्द अधिक होने पर दिन में एक बार या हफ्ते में दो से तीन बार लगाना काफी माना जाता है. सुबह या शाम के समय इसका उपयोग बेहतर माना जाता है, जब शरीर रिलैक्स स्थिति में हो, अधिक बार लगाने से त्वचा में जलन बढ़ सकती है. आप चाहे तो इसे दिन में धूप में सोकर भी लगा सकते हैं.