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SDM Anand Malviya Suspended: देवास जिले के एसडीएम आनंद मालवीय को संभाग आयुक्त आशीष सिंह के आदेश पर निलंबित किया गया है. यह कार्रवाई एक प्रशासनिक आदेश में ‘घंटा’ शब्द के प्रयोग को लेकर हुए विवाद के बाद की गई. इस शब्द पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्ति जताते हुए इसे अमानवीय, असंवेदनशील और निरंकुशता दर्शाने वाला बताया था, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया.
रमाकांत दुबे,
SDM Anand Malviya Suspended: देवास जिले के एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई संभाग आयुक्त आशीष सिंह द्वारा जारी आदेश के तहत की गई है. निलंबन का आदेश प्रशासनिक स्तर पर लिए गए एक विवादित फैसले के बाद सामने आया है, जिसने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया है. दरअसल, हाल ही में एक प्रशासनिक आदेश में ‘घंटा’ शब्द के प्रयोग को लेकर विवाद हुआ था. इस शब्द को लेकर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने ‘घंटा’ शब्द को अमानवीय, असंवेदनशील और निरंकुशता की मानसिकता को दिखाने वाला बताया था. मंत्री विजयवर्गीय का कहना था कि प्रशासनिक भाषा में इस तरह के शब्दों का प्रयोग न केवल अनुचित है, बल्कि यह आम नागरिकों के सम्मान के भी खिलाफ है.
निलंबित करने का आदेश
मंत्री की आपत्ति के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर पर समीक्षा की गई. इसके बाद संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने देवास एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित करने का आदेश जारी किया. आदेश में कहा गया है कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में मर्यादित, संवेदनशील और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग अनिवार्य है और किसी भी अधिकारी द्वारा इसका उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 3 जनवरी 2026 को देवास एसडीएम कार्यालय से एक आदेश (क्रमांक 44/रीडर-1/2026) जारी किया गया था. यह आदेश कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के बारे में था। लेकिन, आदेश की भाषा ने सबको चौंका दिया.
एसडीएम आनंद मालवीय के इस आदेश में लिखा गया कि इंदौर में भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल-मूत्र युक्त गंदा पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई और 2800 व्यक्ति उपचारत हैं. इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के प्रश्न के जवाब में अशोभनीय टिप्पणी ‘घंटा’ का उपयोग करना अमानवीय और निरंकुशता की निशानी है. इतना ही नहीं, सरकारी आदेश में आगे लिखा गया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशानुसार भाजपा सांसदों और विधायकों के घर के सामने ‘घंटा’ बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. आमतौर पर प्रशासनिक आदेशों में केवल प्रदर्शन की सूचना और ड्यूटी का जिक्र होता है, लेकिन इस आदेश में सरकार के खिलाफ ही आरोप और आंकड़े लिख दिए गए, जो कांग्रेस के ज्ञापन या प्रेस नोट का हिस्सा थे.
इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में सभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सरकारी आदेशों और संवाद में शब्दों के चयन को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी. वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेशभर में प्रशासनिक भाषा, अधिकारियों की कार्यशैली और जनसंवेदनशीलता को लेकर बहस भी तेज हो गई है. कई लोग इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे कठोर कार्रवाई बता रहे हैं. फिलहाल, एसडीएम आनंद मालवीय के निलंबन के बाद आगे की जांच और विभागीय प्रक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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