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- Union Budget 2026: PM Modi Meets Economists At NITI Aayog For Key Inputs
नई दिल्ली9 मिनट पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (30 दिसंबर) को नीति आयोग में प्रमुख अर्थशास्त्रियों और सेक्टोरल एक्सपर्ट्स से मुलाकात की। इस मीटिंग में आगामी यूनियन बजट 2026-27 के लिए उनके सुझाव लिए गए। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं।
मीटिंग में अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों पर बातचीत हुई
मीटिंग सुबह 11 बजे शुरू हुई और इसमें अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों पर बातचीत हुई। फोकस नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स, ग्रोथ ड्राइवर्स और टैरिफ के असर पर रहा।
घरेलू कंजम्प्शन, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ, एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और टैरिफ से जुड़ी दिक्कतों पर डिस्कशन हुआ। एक्सपर्ट्स ने भारत की ग्रोथ को आगे बढ़ाने के लिए रिकमेंडेशंस दिए।
मीटिंग का एजेंडा आत्मनिर्भरता और विकसित भारत
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भरता और स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दिया। मीटिंग की थीम थी- ‘आत्मनिर्भरता और स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन: एजेंडा फॉर विकसित भारत’। चर्चा में वर्ल्ड क्लास कैपेबिलिटी बनाने और ग्लोबल इंटीग्रेशन पर बात हुई।
एक्सपर्ट्स से सुझाव लिए गए कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाएं। जॉब क्रिएशन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर भी फोकस रहा।

मीटिंग में कौन-कौन शामिल हुए
मीटिंग में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के अलावा नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी, सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और अन्य मेंबर्स मौजूद थे। प्रमुख अर्थशास्त्री और अलग-अलग सेक्टर्स के एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया। यह प्री-बजट कंसल्टेशन का हिस्सा था।
बजट पेश होने की तारीख
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट में ग्लोबल अनिश्चितताओं और इकोनॉमिक चैलेंजेस को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनाई जाएंगी। एक्सपर्ट्स के सुझाव बजट अनाउंसमेंट्स को शेप दे सकते हैं।
पहले भी हुए कंसल्टेशन
इससे पहले सरकार ने एमएसएमई, कैपिटल मार्केट्स, स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, टूरिज्म जैसे सेक्टर्स से सुझाव लिए। ट्रेड यूनियंस और लेबर ग्रुप्स से भी बात हुई। पब्लिक से भी MyGov वेबसाइट पर सुझाव मांगे गए थे।
आगे क्या असर पड़ेगा
ये सुझाव विकसित भारत 2047 के लॉन्ग टर्म प्लान में मदद करेंगे। मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी मजबूत करने, इमर्जिंग चैलेंजेस से निपटने और सस्टेनेबल ग्रोथ पर फोकस रहेगा। बजट में जॉब्स, इन्वेस्टमेंट और सर्विस सेक्टर को बूस्ट देने वाली पॉलिसी आ सकती हैं।
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