नई दिल्ली. मशहूर डोसा चेन ‘डोसा प्लाजा’ के देश में आज 70 से ज्यादा आउटलेट हैं. इसका कारोबार आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैला है. आज यह स्टार्टअप सालाना 50 करोड़ रुपये का कारोबार करता है. आपको जानकार हैरानी होगी डोसा प्लाजा के फाउंडर प्रेम गणपति कभी मुंबई की एक बेकरी पर बर्तन धोते थे. प्रेम गणपति का जन्म तमिलनाडु के नागलपुरम में हुआ था. वे सात भाई-बहन थे और उनका परिवार बेहद गरीबी में जीवन-यापन करता था. 10वीं तक ही पढ़ाई करने के बाद गणपति चेन्नई आ गए और छोटी-मोटी नौकरी करने लगे. उनकी पगार केवल 250 रुपये महीना थी. एक दोस्त के कहने पर 1990 में वे केवल 200 रुपये लेकर मुंबई आ गए.
दोस्त ने गणपति को 1200 रुपये महीने की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था. शहर पहुंचते ही बांद्रा स्टेशन पर वह दोस्त उसे धोखा देकर गायब हो गया और उसके साथ उसके सारे पैसे और भरोसा भी ले गया. लेकिन इस धोखे ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि नई शुरुआत की आग जला दी. अनजान शहर, न भाषा समझ आए और वापस जाने के लिए जेब में पैसे भी नहीं. गणपति के लिए चारों ओर मुश्किलें ही मुश्किलें थीं.
मुंबई में ही कुछ करने का किया फैसला
कुछ घंटे रेलवे स्टेशन पर बिताने के बाद प्रेम गणपति ने वापस घर न जाने का फैसला किया. दिक्कत ये थी कि यहां कोई उनका परिचित भी नहीं था और उन्हें मराठी और हिन्दी भी नहीं आती थी. लेकिन, उन्होंने मुंबई में ही टिकने का मन बनाया. माहिम में वो एक बेकरी पर पहुंचे और काम देने की गुजारिश की. बेकरी वाले ने उन्हें डेढ़ सौ रुपये महीना पगार पर बर्तन धोने का काम दिया. कुछ दिन बाद उन्होंने पास के ही एक ढाबे पर डोसा बनाना भी शुरू कर दिया. इससे उन्हें थोड़े ज्यादा पैसे मिलने लगे.
दो साल बाद लगाया ठेला
कई साल नौकरी करने के बाद गणपति ने 1992 में अपना काम शुरू किया. 1992 में अपनी बचत के सहारे उसने एक ठेला किराए पर लिया और वाशी रेलवे स्टेशन के सामने इडली-डोसा बेचना शुरू किया. अपने भाई को भी उन्होंने अपने पास बुला लिया. ठेला छोटा था, पर उसका सपना बड़ा. प्रेम ने उसने ठान लिया था कि उसका ठेला शहर का सबसे साफ-सुथरा होगा. वह और उसके भाई साफ कपड़े और टोपी पहनकर काम करते. लोगों ने यह बदलाव देखा, भरोसा किया और स्वाद में घर जैसा अपनापन पाया. जल्द ही यह ठेला महीने में करीब 20,000 रुपये कमाने लगा.
ठेले से दुकान तक का सफर
पांच साल की मेहनत के बाद 1997 में प्रेम ने एक छोटा-सा दुकान का स्पेस किराए पर लिया और उसका नाम रखा ‘Prem Sagar Dosa Plaza’. यहां आने वाले ग्राहक, खासकर छात्र, उसके दोस्त बन गए. उन्हीं के माध्यम से उसने पहली बार इंटरनेट देखा और दुनिया भर के व्यंजनों की जानकारी हासिल की. उसने प्रयोग शुरू किए और जल्द ही शेज़वान डोसा जैसे अनोखे स्वाद सामने आने लगे. अगले कुछ वर्षों में वह 105 से अधिक तरह के डोसे तैयार करने वाला स्थानीय स्टार्टअप बन गया.
प्रेम का सपना एक बड़े मॉल में दुकान खोलने का था, लेकिन, क्योंकि प्रेम सागर डोसा प्लाजा कोई बहुत बड़ा ब्रांड नहीं था तो उन्हें किसी मॉल में जगह नहीं मिल रही थी. वे उदास थे. लेकिन, अचानक उनकी किस्मत ने पलटी मारी. सेंटर वन मॉल के मैनेजर उनके ग्राहक थे. वे प्रेम के डोसा क्वालिटी से बहुत प्रभावित थे. उन्होंने मॉल में स्थान देने की पेशकश खुद ही कर दी. इसी मौके ने प्रेम गणपति की जिंदगी की दिशा ही बदल दी.
अब देश-विदेश में आउटलेट
प्रेम गणपति एक रेस्टोरेंट से खुश नहीं थे. उन्होंने धीरे-धीरे अपना व्यापार बढ़ाना शुरू किया और फ्रेंचाइची मॉडल अपनाया. आज डोसा प्लाजा के देश के 70 से ज्यादा शहरों में आउटलेट हैं. यही नहीं न्यूजीलैंड में तीन और आस्ट्रेलिया में भी डोसा प्लाजा के 2 आउटलेट खुल चुके हैं. डोसा प्लाजा आज 104 तरह के डोसा सर्व करता है.
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