Last Updated:
Chicken winter care-tips : सर्दियों में पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों का एक-दूसरे पर चढ़ना केवल व्यवहार नहीं बल्कि खतरे की घंटी है. यह संकेत तापमान असंतुलन, गलत लाइटिंग और पोषण की कमी की ओर इशारा करता है. समय रहते सही प्रबंधन न हो तो चूज़ों में बीमारियां और नुकसान तेजी से बढ़ सकता है.
सतना : इन दिनों पोल्ट्री फार्मिंग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक कारगर और मुनाफे वाला व्यवसाय बनकर उभरा है. लेकिन सर्दियों का मौसम इस व्यवसाय के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है. ठंड बढ़ते ही अगर पोल्ट्री शेड में मुर्गियां या चूज़े एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते और सटते हुए नजर आने लगें तो यह सामान्य व्यवहार नहीं बल्कि एक चेतावनी संकेत है. यह संकेत बताता है कि शेड में तापमान, रोशनी या पोषण में कहीं न कहीं कमी है. अगर समय रहते इन संकेतों को नहीं समझा गया, तो फार्म में मार्टेलिटी रेट बढ़ सकता है और सीधा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
ठंड में क्यों सटने लगते हैं चूज़े
लोकल 18 से बातचीत में पशु चिकित्सक डॉ. बृहस्पति भारती बताते हैं कि ठंड के मौसम में चूज़े और मुर्गियां इंसानों की तरह ही ठंड से बचने की कोशिश करते हैं और संकेत देते है. जैसे हम ठंड में एक-दूसरे के करीब बैठते हैं वैसे ही चूज़े भी गर्मी पाने के लिए एक-दूसरे से सट जाते हैं. कई बार वे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं जिससे दबने और दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है. इसी वजह से ठंड के मौसम में पोल्ट्री फार्म में मृत्यु दर (मार्टेलिटी) तेजी से बढ़ सकती है.
तापमान और रोशनी का सही प्रबंधन
डॉ. भारती के अनुसार ठंड में पोल्ट्री शेड का तापमान सबसे अहम भूमिका निभाता है. दिन के समय तो प्राकृतिक रोशनी से काम चल जाता है लेकिन शाम और रात के समय पर्याप्त कृत्रिम रोशनी की व्यवस्था जरूरी है. इसके लिए हाइलोजन या बल्ब का उपयोग किया जाना चाहिए. ध्यान रखें कि जितने छोटे चूज़े होंगे उन्हें उतनी ही ज्यादा गर्मी और रोशनी की जरूरत पड़ेगी. जैसे ही शेड में पर्याप्त रोशनी और गर्मी मिलती है चूज़े अपने आप फैलने लगते हैं और एक-दूसरे से दूरी बना लेते हैं.
शेड को ठंडी हवा से कैसे बचाएं
ठंड के मौसम में पोल्ट्री शेड को पूरी तरह से पैक करना बेहद जरूरी है. इसका खास ध्यान रखें कि ठंडी हवा सीधे अंदर न आए, इसके लिए हरे रंग की मोटी चादर या जूट के बोरे का इस्तेमाल किया जा सकता है. शेड को ढकने से न केवल ठंड से बचाव होता है बल्कि चूज़ों की सांस संबंधी समस्याएं भी कम होती हैं. डॉ. भारती बताते हैं कि ठंड में चूज़ों की नाक बंद हो जाती है और वे मुंह से सांस लेने लगते हैं जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
सर्दियों में सही आहार है सबसे बड़ी ताकत
ठंड में मुर्गियों को अतिरिक्त ऊर्जा और गर्मी देने वाले आहार की जरूरत होती है. इसके लिए साबुत अनाज जैसे मक्का, बाजरा और जई बेहद फायदेमंद हैं साथ ही सूरजमुखी के बीज, कीड़े (वर्म), और उच्च प्रोटीन वाला फीड देना चाहिए. शुरुआती चूज़ों को गुड़ मिला पानी देना एक पुरानी लेकिन कारगर विधि मानी जाती है. इसके अलावा पालक, गाजर जैसी पत्तेदार सब्जियां, थोड़ी मात्रा में फल और दलिया भी आहार में शामिल किया जा सकता है. साफ और हल्का गुनगुना पानी देना भी जरूरी है. इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और जिंक सप्लीमेंट का उपयोग लाभदायक होता है.
बिछावन का सही चुनाव भी जरूरी
गग्रामीण एक गलती जरूर करते है, शेड के फर्श पर बिछावन के लिए कुछ न जरूर डालते है जिसमें वो भूसी और पैरा दोनों का इस्तेमाल करते है लेकिन विशेषज्ञ भूसी को बेहतर विकल्प मानते हैं. भूसी जल्दी गीली नहीं होती और लंबे समय तक बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं पैरा चार से सात दिन में गीला होकर अमोनिया जैसी बदबू देने लगता है जो मुर्गियों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है.
डॉ. भारती बताते हैं कि सर्दियों में चिक्स के बाजार भाव भी घट जाते हैं. ऐसे में अगर सही देखभाल न की जाए तो किसान को दोहरा नुकसान झेलना पड़ सकता है. इसलिए ठंड के मौसम में पोल्ट्री फार्म में तापमान, रोशनी, आहार और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देकर ही मुनाफे को सुरक्षित रखा जा सकता है.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
.