सिस्टम से तेज भागती आबादी: 70 हजार जन्म, नसबंदी सिर्फ 25 हजार; हर साल 45 हजार आवारा कुत्ते बढ़ रहे – Bhopal News


शहर के अयोध्या नगर में स्ट्रीट डॉग की शिकायत करना दो महिलाओं को भारी पड़ गया। नगर निगम में शिकायत दर्ज कराने के बाद उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया। यह घटना शहर में बढ़ते स्ट्रीट डॉग आतंक और उससे जुड़े सामाजिक तनाव की गंभीर तस्वीर पेश करती है। भोपाल में रोजाना औसतन 14 इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं, जो अन्य बड़े शहरों की तुलना में लगभग दोगुनी हैं। यह स्थिति तब है, जब नगर निगम प्रतिदिन 60 से अधिक डॉग पकड़ने का दावा करता है। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख से ज्यादा स्ट्रीट डॉग हैं। इनमें लगभग 30 हजार मादा डॉग हर वर्ष 70 हजार से अधिक बच्चों को जन्म देती हैं। इसके मुकाबले नगर निगम सालाना केवल 22 से 25 हजार डॉग का नसबंदी (एबीसी) ऑपरेशन कर पाता है। नतीजतन हर वर्ष करीब 45 हजार डॉग की संख्या में शुद्ध बढ़ोतरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर में हर साल लगभग 70 हजार डॉग का वैक्सीनेशन होना चाहिए, जबकि अभी यह संख्या महज 22 हजार तक सीमित है। इससे रैबीज का खतरा भी बना हुआ है। जरूरत 12 एबीसी सेंटर की, लेकिन सिर्फ तीन चल रहे वर्तमान में शहर में केवल तीन एबीसी सेंटर संचालित हैं। नगर निगम ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में कुल 12 सेंटर की आवश्यकता जताई थी। हाल ही में प्रदेश सरकार के बजट में दो नए एबीसी सेंटर खोलने की घोषणा की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं होगी। हर टीम में 10-12 कर्मचारी लेकिन क्षमता से कम काम
डॉग पकड़ने के लिए निगम की पांच टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक टीम में 10-12 कर्मचारी और एक प्रभारी है। एक वाहन में 20-22 डॉग ले जाने की क्षमता है, लेकिन सभी टीमें मिलकर प्रतिदिन केवल 70 डॉग ही पकड़ पा रही हैं। पूर्ण क्षमता से काम होने पर यह संख्या 100 प्रतिदिन से अधिक हो सकती है। प्रति डॉग खर्च बढ़ेगा, 11.55 करोड़ रुपए बजट प्रस्तावित
नगर निगम अभी प्रति डॉग करीब 1000 रुपये खर्च कर रहा है, जिससे सालाना लगभग 2 करोड़ रुपये व्यय हो रहे हैं। आगामी नए प्रस्ताव में प्रति डॉग खर्च बढ़ाकर 1650 रुपये करने की योजना है। इसके लिए करीब 11.55 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। रोजाना 70 स्ट्रीट डॉग पकड़कर एबीसी सेंटर भेज रहे
अपर आयुक्त हर्षित तिवारी के अनुसार, शहर से प्रतिदिन 70 से अधिक डॉग पकड़कर एबीसी सेंटर भेजे जा रहे हैं और टीमों को अधिकतम क्षमता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2030 तक पूरे भोपाल शहर को रैबीज फ्री सिटी बनाने की कार्ययोजना केंद्र सरकार को भेजी गई है, जिसमें हर 10 वार्ड पर एक एबीसी सेंटर की आवश्यकता बताई गई है। .

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